फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारी तंत्र समय पर जागता तो बच जाता कोटखाई थाना

Fri, 21 Jul 2017 09:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
कोटखाई थाने का पूरा रिकॉर्ड और कोर्ट के लिए जुटाए गए पुलिस के सबूत राख होने के बाद वीरवार को लोग शांत रहे। लोगों का कहना है कि सरकार समय पर पहल करती तो न तो थाना जलता और न ही पुलिस के वाहन आग की भेंट चढ़ते। आम लोग घटना के बाद अब पछतावा कर रहे हैं। 
विज्ञापन


वीरवार को कोटखाई का बाजार दोपहर बाद पूरी तरह वीरान नजर आया। आग के बाद थाने के भीतर कोई भी रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं बचा है। उग्र भीड़ ने पुलिस की वर्दी के अलावा बिस्तर तक फाड़कर बिखेर दिए हैं। मालखाने में चारों तरफ टूटा-फूटा सामान पड़ा है। कार्यालय-बैरक कुछ भी नहीं बचा।

आग से भवन के दरवाजों और खिड़कियों को अधिक नुकसान हुआ है। थाने के कंप्यूटरों को पटक पटक कर पहले तोड़ा गया, उसके बाद आग के हवाले किया गया। पुलिस हिरासत में आरोपी सूरज की मौत मंगलवार रात को हो चुकी थी। पुलिस को थाना सुरक्षित बचाने के लिए बारह घंटे का समय था। अधिकारियों की लापरवाही थाने के आग की भेंट चढ़ने का भी बड़ा कारण बताई जा रही है। 
विज्ञापन



जितनी संख्या में वीरवार को कोटखाई में पुलिस बल तैनात था, यदि बुधवार दोपहर तक इतनी पुलिस पहुंची होती तो थाना और वाहन जलने से बच गए होते। एसपी स्टेट सीआईडी क्राइम ब्रांच अशोक शर्मा मौके पर पहुंचकर टीम के साथ आगजनी की घटना की जांच कर रहे हैं। 

वीरवार को शांत रहा कोटखाई
वीरवार को पूरा दिन कोटखाई क्षेत्र शांत रहा। भाजपा की ओर से बंद का पूरा असर दिखा, लेकिन किसी भी स्थान पर न तो कोई नारेबाजी हुई और न ही जुलूस निकाले गए। कोटखाई बाजार में भाजपा पहले जुलूस निकालने की तैयारी में थी। कुछ लोग भी पहुंच चुके थे, लेकिन बाद में किसी ने गुम्मा कोटखाई सहित किसी भी स्थान पर कोई प्रदर्शन नहीं किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें