पीडब्ल्यूडी में कनिष्ठ प्रारूपकारों (जूनियर ड्राफ्ट्समैन) की बैचवाइज नियुक्तियों में धांधली का खुलासा हुआ है। आरोप है कि 72 फीसदी अंक वाले सामान्य आईआरडीपी को छोड़ 38 फीसदी वाले ओवरएज अभ्यर्थियों का चयन किया गया। सामान्य, अनुसूचित जाति और आईआरडीपी पिछड़ा वर्ग को भी नहीं बख्शा गया।
अनुसूचित जाति के 65 फीसदी से ऊपर के शीर्ष 3 अभ्यर्थियों को नजरअंदाज कर 40 फीसदी वालों को भी नौकरी मिल गई। आरटीआई में इसका खुलासा हुआ है। पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बीआर कौंडल और सामाजिक कार्यकर्ता देशराज शर्मा के मुताबिक नियुक्तियों में भारी धांधली हुई है। इस संबंध में दस्तावेजों सहित भ्रष्टाचार निरोधक यूनिट मंडी में भी शिकायत दर्ज कराई जाएगी। उपेक्षित अभ्यर्थी मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
कौंडल और देशराज ने बताया कि सामान्य श्रेणी के 27, सामान्य आईआरडीपी के 3 पदों के लिए 1986, 87, 88 और 89 के बैच में से 12 ओवरएज को कम अंकों के बावजूद नियुक्ति मिल गई। एक अतिरिक्त सूची सामान्य और अनुसूचित जाति, जनजाति, आईआरडीपी और पिछड़ा वर्ग की नियुक्तियों की प्रक्रिया के बाद जोड़ी गई। इसमें शामिल 2 ओवरएज अभ्यर्थियों को कम अंकों के बावजूद नियुक्ति दी गई।