कोर्ट ने धोखाधड़ी के चार दोषियों को तीन-तीन साल कारावास और पचास हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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जेएमआईसी कोर्ट नंबर तीन ने धोखाधड़ी के चार दोषियों को तीन-तीन साल कारावास और पचास हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर में 27 मई 2005 को सीपीएमटी की परीक्षा आयोजित हुई थी। इसमें दो दोषियों को अन्य दो दोषी अभ्यर्थियों की परीक्षा देते हुए पकड़ा गया था।
सहायक जिला न्यायवादी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि शिक्षा विभाग के रीडर रमेश चंद ने पुलिस थाना सदर में शिकायत दर्ज करवाई थी कि 27 मई 2005 को सीपीएमटी की परीक्षा थी। परीक्षा हॉल में रोल नंबर 11663 और 11590 से परीक्षा देते हुए अन्य लोग अभ्यर्थी पाए गए।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्जकर कार्रवाई शुरू की। मामला न्यायालय पहुंचा। यहां जेएमआईसी कोर्ट नंबर तीन के न्यायाधीश निशांत वर्मा ने मुनीष कुमार पुत्र राजेश्वर प्रसाद निवासी मुज्जफरनगर बिहार, संजय कुमार पुत्र शंकर झा निवासी
वाल्मीकि नगर जिला पश्चिमी चंपारन बिहार, संजीव कुमार पुत्र नागेंद्र कुमार निवासी मुज्जफरनगर बिहार, अंकित शर्मा पुत्र विजय शर्मा निवासी नूरपुर जिला कांगड़ा को तीन-तीन साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
इसके अलावा पवन कुमार पुत्र राजकुमार निवासी बिहार इस मामले में भगोड़ा घोषित है। जबकि विजय कुमार पुत्र कर्मचंद निवासी रैहन जिला कांगड़ा की मौत हो चुकी है। इसी मामले में देशराज पुत्र शालिगराम निवासी नंदोल जिला कांगड़ा, अजय कुमार पुत्र नानक चंद निवासी रैहन जिला कांगड़ा बरी हो चुके हैं।
धोखाधड़ी के इस मामले में न्यायालय ने चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल की कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सरकार की ओर से कुल 19 गवाह पेश किये गए। मामले की छानबीन एएसआई सतीश कुमार और पैरवी सहायक जिला न्यायवादी भूपेंद्र सिंह ने की है।