लेकिन ग्रामीणों ने उनके मंसूबे पर पानी फेर दिया। वन विभाग की टीम ने काटे गए सभी पेड़ों की गिनती की जिसमें 93 पेड़ों को काटने की पुष्टि हुई है। काटे गए पेड़ों में इमारती लकड़ी में इस्तेमाल होने वाले पेड़ों के अलावा पशुचारे और बालन के रूप में इस्तेमाल होने वाले दूसरे पेड़ भी शामिल हैं।
पेड़ कटान की भनक लगते ही विभाग ने रेंज ऑफिसर और बीओ को मौके पर भेज दिया था। मौके पर मौजूद वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि पेड़ों को अवैध रूप से काटा है। पेड़ काटने की अनुमति नहीं ली है।
उधर ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन से मजदूर खेतों में झाड़ियां काटने का काम कर रहे थे। इन झाड़ियों को काटने के बाद उन्होंने पेड़ों को काटना भी शुरू कर दिया। ज्यादातर पेड़ रात के अंधेरे में काटे गए हैं।
वन मंडल अधिकारी एचके शर्मा ने कहा कि निजी भूमि पर 93 हरे पेड़ काटे गए हैं। इन पेड़ों को काटने की कोई इजाजत नहीं ली गई थी। वन विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जरूरत पड़ी तो आरोपियों के खिलाफ विभाग कोर्ट भी जाएगा। रिपोर्ट उन्हें मिल गई है अब नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
सिर्फ पांच पेड़ों की मिलती है इजाजत : शर्मा
निजी भूमि पर पेड़ काटने से पूर्व भी वन विभाग की इजाजत लेनी पड़ती है। विभाग ज्यादा से ज्यादा एक बार में पांच पेड़ काटने की इजाजत दे सकता है। लेकिन यदि पेड़ काटने से पूर्व इजाजत नहीं ली गई है तो विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाती है। डीएफओ एचके शर्मा के अनुसार कुंदला में कटे पेड़ों पर विभाग कार्रवाई करेगा।