हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) को सोसायटी से कंपनी में तब्दील करने के मामले में एसोसिएशन को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। शीर्ष अदालत ने इससे संबंधित मुकदमे पर रोक लगा दी है।
इस मामले में सांसद और एचपीसीए के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी आरोपी हैं। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने एसोसिएशन की याचिका पर हिमाचल प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए आठ हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है।
एसोसिएशन की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और आरोप बेबुनियाद हैं। यहां तक कि हाईकोर्ट भी इस मामले को राजनीति से प्रेरित बता चुकी है। सतर्कता ब्यूरो ने एसोसिएशन पर गैरकानूनी तरीके से स्टेडियम के लिए जमीन हासिल करने का मामला दर्ज किया था।
एसोसिएशन पर लगे हैं ये आरोप
एसोसिएशन पर गलत तरीके से सोसायटी से कंपनी में तब्दील करने का आरोप लगाया गया है। ब्यूरो ने एक अगस्त, 2013 को अनुराग ठाकुर और धूमल और उनकेछोटे बेटे अरुण धूमल समेत 19 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, सबूत नष्ट करने का मुकदमा दर्ज किया था।
साथ ही इन पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13बी के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। अप्रैल, 2014 में विजिलेंस, भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने सभी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अप्रैल 2014 में राज्य सरकार ने राज्यपाल से धूमल के खिलाफ अभियोजन अनुमति ली थी।