हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) के धर्मशाला में होटल पवेलियन के लिए सैकड़ों पेड़ काटने के मामले में भी भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर हो गया है।
मंगलवार को धर्मशाला जिला एवं सत्र न्यायालय में विशेष न्यायाधीश के समक्ष विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में चालान पेश कर दिया। चालान में एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग ठाकुर, प्रवक्ता संजय शर्मा, सचिव विशाल मरवाह, सेवानिवृत्त तहसीलदार जगदीश राम, 2009 में कानूनगो रहे कुलदीप कुमार और आरओ विधि चंद को आरोपी बनाया गया है।
इन पर होटल निर्माण के लिए सैकड़ों हरे पेड़ काटने का आरोप है। गौरतलब है कि एचपीसीए को कंपनी बनाने के मामले में विजिलेंस अनुराग ठाकुर के खिलाफ अप्रैल, 2014 में एक अन्य चालान पेश कर चुकी है।
ये है पूरा मामला
होटल के लिए पेड़ काटने के मामले में विजिलेंस ने एचपीसीए के खिलाफ 29 नवंबर 2013 को आईपीसी की धारा 406, 447, 201, 120बी, भ्रष्टाचार अधिनियम 13 (2) और फोरेस्ट कंजरवेशन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।
एफआईआर नंबर 17/13 में वर्ष 2009 में संबंधित क्षेत्र में पटवारी रहे जगत राज को भी नामजद किया था। अभियोजन मंजूरी नहीं मिलने के कारण अभी उन्हें चालान में शामिल नहीं किया है। उधर, अनुराग ठाकुर का कहना है कि वीरभद्र सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है।
वीरभद्र पर खुद तलवार लटकी है, इसलिए जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। पेड़ कटान पर जो चालान पेश किया है उसमें आरोप सही नहीं हैं। हमने कंडीशंस के अनुसार काम किया है। अधिकारियों की क्लीयरेंस के बाद ही हम आगे बढ़े हैं। वीरभद्र को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनाने की बात आज तक रास नहीं आ पाई है।
ये धाराएं लगीं
अनुराग पर आरोप है कि एचपीसीए के मुख्य पदाधिकारी के तौर पर इन्हीं के निर्देशों से होटल द पवेलियन निर्माण में अनियमतिताएं बरती गईं। इन पर आपराधिक षड्यंत्र रचने और उसमें शामिल होने का आरोप है। इसके अलावा उन पर सरकारी अमानत को खुर्द बुर्द करने, लीज पर मिली जमीन के दुरुपयोग और तथ्यों को छिपाने की धाराएं लगाई गई हैं।
विजिलेंस ने होटल द पवेलियन के निर्माण के लिए सैकड़ों पेड़ काटने के आरोप में एचपीसीए के खिलाफ यह तीसरी एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में एचपीसीए पदाधिकारियों पर झूठे दस्तावेज तैयार करने और सरकारी कर्मचारियों पर इसमें सहयोग करने का आरोप है।
आरोप है कि एचपीसीए को लीज डीड के लिए वन विभाग ने जो एनओसी दी उसमें जमीन पर खड़े पेड़ों का जिक्र नहीं किया गया। जबकि, वर्तमान में अभी भी इस जमीन पर 2023 पेड़ खड़े हैं।