हाईकोर्ट ने बहू को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले 92 वर्षीय ससुर और 75 वर्षीय सास को दंड स्वरूप 25-25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें जेल भेजने की बजाय जुर्माने की सजा को उचित ठहराया।
हालांकि, कोर्ट ने 30 वर्षीय दोषी पति को 3 वर्ष कठोर कारावास और 25 हजार रुपये हर्जाने की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कांगड़ा के 30 अक्तूबर, 2008 के फैसले को पलटते हुए यह सजा सुनाई। न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ के समक्ष सास पुष्पा देवी और ससुर चुनी लाल ने पश्चाताप व्यक्त करते हुए दंड के प्रति नरमी बरतने की गुहार लगाई थी।