हिमाचल में अब तक की सबसे ज्यादा हाईटेक नकल का पर्दाफाश हुआ है। नकल में स्पाई कैमरा, ब्लू टुथ, माइक्रो चिप और टीम व्यूअर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया। मामला पुलिस कांस्टेबल के डेढ़ हजार पदों के लिए 29 मई को हुई लिखित भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। पुलिस ने परीक्षा के टॉपर समेत छह लोगों को हिरासत में लिया है।
इस हाईटेक नकल के खेल में शिक्षा विभाग के अफसर भी शामिल थे जिन्होंने नाहन सेंटर पर आसानी से नकल कराने का पूरा जाल बिछाया था। पुलिस के अनुसार 25 हजार रुपये में दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक्स किट खरीदी गई। 3 लाख रुपये देकर शिक्षा विभाग के सीनियर असिस्टेंट से सेटिंग की गई।
सीनियर असिस्टेंट ने केबल ऑपरेटर और दुकानदार समेत तीन और लोगों के साथ मिलकर न सिर्फ परीक्षा पास कराई बल्कि टॉप भी करवा दिया। नतीजे घोषित हुए तो कुल 80 में से 75 अंक लेकर सुशील प्रदेश में टॉपर बना जबकि गुरप्रीत ने भी 67 अंक लिए। नतीजे घोषित होने के बाद सुशील और गुरप्रीत के खिलाफ एक गुमनाम शिकायत पत्र पुलिस को मिला। जांच हुई तो सब सामने आ गया। पुलिस ने नकल कराने वाले आरोपियों से 2.70 लाख रुपये बरामद भी कर लिए हैं।
ये हाईटेक नकलची स्पाई कैमरा, ब्लू टुथ, माइक्रो चिप लेकर परीक्षा दे रहे थे। त्वचा के रंग का छोटा सा कैमरा इनकी कलाई पर बंधा था जिसके जरिए आब्जेक्टिव सवालों का पर्चा केंद्र के बाहर 200 मीटर के दायरे में बैठे उनके साथी अपनी मोबाइल जैसी स्क्रीन पर देख सकते थे। वे ब्लू टुथ के जरिए प्रश्न पत्र हल करवाने में सफल रहे। 29 मई को सुशील कुमार शमशेर वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला और गुरप्रीत आर्ट कॉलेज में परीक्षा के लिए बैठे थे।
दिल्ली से 25 हजार में खरीदी किट
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि नकल के तमाम उपकरण 25,000 रुपये में दिल्ली से खरीदे थे। आईजी दक्षिणी रेंज जहूर जैदी ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि जय प्रकाश नामक शख्स दिल्ली से यह किट खरीदकर लाया था जबकि शिक्षा विभाग के सीनियर असिस्टेंट रमनदीप को जितेंद्र के माध्यम से गुरप्रीत ने तीन लाख रुपये दिए थे। बताते चलें कि इस परीक्षा के लिए पुलिस महकमे ने शिक्षा विभाग को इंतजाम सौंपा था।
ऐसे खुली हाईटेक नकल की गुत्थी
आधुनिक उपकरणों की मदद से की गई इस नकल की शिकायत के बाद पुलिस के लिए कड़ी से कड़ी जोड़ना आसान नहीं था। चूंकि परीक्षा हो चुकी थी इसलिए पुलिस ने तकनीकी जांच पर जोर दिया। गुमनाम चिट्ठी में मिली शिकायत के बाद पुलिस के निशाने पर सबसे पहले टॉपर आए।
टॉपरों के फोन नंबरों की काल डिटेल के जरिये जांच टीम मुख्य आरोपी रमनदीप तक पहुंची। इसके बाद रमनदीप के फोन, उसके फोन से की गई कॉल और दूसरे लोगों की मोबाइल लोकेशनों को भी पुलिस ने ट्रेस किया। इन्हीं के जरिये पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सबूत पुख्ता किए और फिर सभी को पकड़ लिया। मामले की जांच एएसपी विनोद धीमान के नेतृत्व में चली।
ये लिए हैं हिरासत में
अभ्यर्थी सुशील और गुरप्रीत के अलावा पुलिस ने शिक्षा विभाग में कार्यरत सीनियर असिस्टेंट रमनदीप, केबल ऑपरेटर जितेंद्र उर्फ जॉनी, दुकानदार जय प्रकाश और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े कृष्णकांत को हिरासत में लिया है।