बीते चार साल में 2.38 लाख में से 19,915 छात्रों को चार मोबाइल फ ोन नंबर से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति राशि जारी कर दी गई। 360 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति चार बैंक खातों में ट्रांसफ र की गई। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में तो आधार नंबर का प्रयोग ही नहीं किया गया है।
साल 2013-14 से लेकर साल 2016-17 तक शिक्षा विभाग ने भी किसी स्तर पर छात्रवृत्ति योजनाओं की मानीटरिंग नहीं की। अब इन सारे आरोपों की जांच पुलिस कर रही है।
जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने की शिकायतें मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच की।
इस जांच में शिक्षा विभाग के मुताबिक प्रदेश के कई इलाकों में फ र्जी एडमिशन से छात्रवृत्ति राशि के नाम पर घोटाले होने की बात सामने आई। कथित घोटाले की राशि 250 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है।
क्या कहता है पुलिस प्रशासन
एएसपी सिटी प्रवीर ठाकुर ने कहा कि मामले की हर पहलू पर जांच की जा रही है। इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान लिए गए हैं।