प्रदेश हाईकोर्ट ने अधीनस्थ न्यायिक अधिकारी सिद्धार्थ सरपाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 और 201 के तहत सीबीआई कोर्ट शिमला की ओर से आरोप निर्धारित किए जाने के आदेश को सही ठहराते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया है।
प्रार्थी सिद्धार्थ सरपाल ने उसके खिलाफ आरोप तय किए जाने के सीबीआई कोर्ट शिमला के आदेश को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने प्रार्थी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सीबीआई कोर्ट शिमला की ओर से पारित आदेश कानूनी तौर पर सही हैं।
यह प्रार्थी के खिलाफ अभियोजन पक्ष की ओर से जुटाए गए साक्ष्यों पर आधारित है। गौरतलब है कि प्रार्थी के खिलाफ पुलिस स्टेशन बालूगंज शिमला में भारतीय दंड संहिता की धारा 306 ए, 201 और 34 के तहत मामला दर्ज है।
रितु कल्मोटिया ने कर ली आत्महत्या
शिकायतकर्ता पिता ने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी रितु कल्मोटिया ने मार्च 2010 में आत्महत्या की थी। प्रार्थी ने रितु कल्मोटिया को आत्महत्या करने के लिए उकसाया।
यह भी आरोप लगाया गया कि प्रार्थी के पिता, जो एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी थे और दो अन्य लोग 28 मार्च 2010 को रितु कल्मोटिया के घर गए और साक्ष्यों को नष्ट कर दिया।
इस आपराधिक मामले की प्रारंभिक जांच हिमाचल पुलिस ने की थी। लेकिन पुलिस की जांच से असंतुष्ट होकर शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई कि इस जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा जाए क्योंकि उक्त न्यायिक अधिकारी के पिता प्रदेश पुलिस में ऊंचे ओहदे पर कार्यरत थे।
हाईकोर्ट के आदेशानुसार सीबीआई ने प्रार्थी के खिलाफ 25 मई, 2010 को शिमला ब्रांच में मामला दर्ज किया। मामले की जांच करने के बाद सीबीआई कोर्ट शिमला में चालान पेश किया।
पहले किया शादी का वादा फिर किया इंकार
सीबीआई की पेश की गई रिपोर्ट में अदालत को बताया गया कि रितु और प्रार्थी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के समय से एक दूसरे को जानते थे। प्रार्थी के न्यायिक अधिकारी और मृतका के लेक्चरर नियुक्त होने के बाद तक भी उनका संबंध बरकरार रहा।
उन्होंने एक दूसरे से शादी करने का निर्णय ले लिया जोकि प्रार्थी के परिजनों को मंजूर नहीं था। लेकिन प्रार्थी ने मृतका (रितु) और उसके परिवार वालों को बताया कि वह किसी भी हालात में उनकी बेटी के साथ ही शादी करेगा। लेकिन प्रार्थी ने 24 मार्च 2010 को डॉक्टर पूजा थमी से मंगनी कर ली।
सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रार्थी ने मंगनी वाली बात रितु कल्मोटिया को 27 मार्च, 2010 को बताई। जिसे वह बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने आत्महत्या कर ली।
सीबीआई द्वारा चालान पेश करने के बाद विशेष जज द्वारा 22 जनवरी 2013 को प्रार्थी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 और 201 के तहत आरोप तय किये थे। इस आदेश को प्रार्थी ने हाई कोर्ट के समक्ष चुनौती दी जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।