प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद अब तक सीबीआई ने एडवांस्ड स्टडी से चोरी हुए ऐतिहासिक घंटा मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की है। शिमला पुलिस को हाईकोर्ट के इस आदेश की कॉपी पहुंच चुकी है। इस पर पुलिस ने रिकार्ड सीबीआई की शिमला शाखा के सपुर्द करना चाहा लेकिन उन्होंने रिकार्ड लेने से इंकार कर दिया।
शिमला पुलिस की ओर से इस मामले में जारी किया गया पत्र भी रिसीव तक नहीं किया। सीबीआई कार्यालय से पुलिस को मौखिक में जवाब दिया गया कि इस रिकार्ड को दिल्ली मुख्यालय भेजें। पुलिस को हाईकोर्ट की ओर से आदेश हैं कि रिकार्ड सीबीआई की शिमला शाखा को सौंपे। सीबीआई कार्यालय के दो बार चक्कर काटने के बाद भी रिकार्ड नहीं लिया गया।
अब शिमला पुलिस ने सीबीआई से आग्रह किया है कि वह लिखित में उन्हें बताए कि रिकार्ड को कहां भेजना है? प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक अक्तूबर को इस मामले को शिमला पुलिस से लेकर सीबीआई के सपुर्द करने के आदेश दिए। उच्च न्यायालय में इस मामले में सीबीआई से तीन सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है। सीबीआई ने इस मामले में अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया तो ऐसे में प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना कैसे हो पाएगी? तीस किलो का यह घंटा अष्टधातु का है।
1903 में तत्कालीन नेपाल नरेश राजा रत्न बहादुर सिंह ने यह गिफ्ट दिया था। यह घंटा मुख्यद्वार से कुछ कदम दूर रिसेप्शन के सामने बरामदे में लगा हुआ था। 21 अप्रैल 2010 की रात यह घंटा चोरी हो गया था। थाना बालूगंज में मुकदमा पंजीकृत हुआ। इसके बाद पुलिस तफ्तीश में चोरों का आज तक कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस ने इस बारे में अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट पेश की। इस पर एडवांस्ड स्टडी प्रबंधन ने अदालत में याचिका दायर कर मामले को सीबीआई के सपुर्द करने की अपील की थी।
ऐसे काम करता है सिस्टम
हाईकोर्ट ने एक अक्तूबर को घंटा चोरी मामले की जांच सीबीआई को देते हुए तीन हफ्ते के भीतर रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन आज 21 दिन हो गए और अब तक सीबीआई शिमला पुलिस से रिकार्ड लेने तक नहीं पहुंची। इससे साफ जाहिर है हमारा सिस्टम किस तरह काम करता है। अब देखना यह है कि हाईकोर्ट का इस पूरे मामले पर क्या रुख होगा?