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लोन के 14 लाख डकार गए बैंक के मैनेजर साहब

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हिमाचल के ऊना जिले में गगरेट के कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंधक और आठ कर्मचारियों पर आवेदक के लोन के 14 लाख रुपये डकारने के आरोप में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि बैंक ने 20 लाख का लोन तो पास किया लेकिन, आवेदन को छह लाख ही जारी किए। 14 लाख दिए ही नहीं। आवेदक को उस समय पता लगा जब उससे 14 लाख रुपये का लोन न चुकाने के लिए बैंक की ओर से नोटिस जारी किया गया।
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पुलिस ने कोर्ट के आदेशों पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। महेंद्र सिंह पुत्र विचित्र सिंह निवासी गगरेट ने शिकायत दर्ज करवाई है कि 2010 में संबंधित बैंक से हाउस लोन की स्कीम के तहत 20 लाख का लोन पास करवाया। लोन की तीन-तीन लाख की दो किश्तें लीं।

कागजों में देय घोषित कर दिए 14 लाख

बैंक ने कुल छह लाख का भुगतान किया गया, लेकिन बैंक ने उसे शेष 14 लाख की राशि देने के बजाय उन्हें कागजों में देय घोषित कर शेष राशि हड़प ली। बैंक की रिकार्ड बुक में दर्ज है कि बैंक की ओर से शेष 14 लाख भी आवेदनकर्ता को दे दिए गए हैं।

शिकायतकर्ता महेंद्र सिंह ने अदालत को दी तहरीर में कहा है कि उनके साथ हुए धोखे का पता उसे तब चला जब उससे शेष राशि की किस्तें मांगी जाने लगीं। पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज न करने पर विजिलेंस में शिकायत दी। लेकिन थक हार कर उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

केसीसीबी गगरेट ब्रांच के सहायक महाप्रबंधक राकेश कुमार ने कहा कि उक्त व्यक्ति के आरोप निराधार हैं। वह बैंक का पूरा लौटाने से बचने के लिए ऐसा कर रहा है। बैंक ने नियमानुसार पूरा लोन दिया है।
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धोखाधड़ी के आरोप झूठे : बैंक प्रबंधक

केसीसी बैंक ने बैंक की गगरेट शाखा के कर्मचारियों पर लगाए गए आरोपों को नकारते हुए इन्हें आधारहीन और तथ्यों से परे बताया है। बैंक के सहायक महाप्रबंधक राकेश कुमार ने पत्रकार वार्ता में कहा कि बैंक की गगरेट शाखा के बारे में एक व्यक्ति की ओर से धोखाधड़ी के जो आरोप लगाए गए, वह पूरी तरह से गलत हैं।

उन्होंने कहा कि बैंक की ओर से उक्त व्यक्ति और उसकी पत्नी को जो लोन दिया गया, वह पूरी तरह से नियमानुसार दिया गया था। जबकि लोन की वसूली के लिए जब भी कोई बैंक कर्मी उनके पास जाता था तो वह पैसा देने में आनाकानी करता था और कर्मचारी के साथ उचित व्यवहार नहीं करता था।

इस संबंध में बैंक की ओर से लोन की वसूली के लिए सरफेसी-एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है, जो डीआरटी चंडीगढ़ में लंबित है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त व्यक्ति बैंक कर्मचारियों को तंग करने के लिए बार बार आरटीआई दाखिल करता रहा। लेकिन बैंक के कहने के बावजूद अपनी ओर से मांगी गई सूचनाओं का उत्तर लेने नहीं आया।

उन्होंने कहा कि उक्त व्यक्ति बैंक के पैसे लौटाने से बचने के लिए और बैंक की साख को नुकसान पहुंचाने के लिए यह सब कर रहा है। उन्होंने बताया कि उक्त व्यक्ति तथा उसकी पत्नी पर बैंक का कुल लगभग 14 लाख रुपये लोन अभी बकाया है। जोकि उनकी ओर से गृह निर्माण के लिए 2010 में लिया गया था।
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