लेकिन सहकारी सभाएं इसके विपरीत आठ से बारह प्रतिशत ब्याज ऋणदाताओं से वसूल कर मोटी कमाई कर रही हैं। सहकारी सभाओं द्वारा बैंकिंग का कार्य करने पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। सहकारी सभाओं को निर्देशित किया गया है कि वह अपने स्थान से चार किमी के दायरे में ही लेन देन कर सकती है। लेकिन सहकारी सभाओं ने लक्ष्मण रेखा को पार कर दूसरे जिला में ही नहीं बल्कि प्रदेश के बाहर भी लेन देन प्रक्रिया शुरू कर रखी है।
जिसका खामियाजा सहकारी सभा तलाई को भुगतना पड़ रहा है। सरकारी नियंत्रण न होने के कारण यह सभाएं अपना ऑडिट सेवा निवृत अधिकारियों से करवाती आ रही है लेकिन प्रतिवर्ष हो रहे ऑडिट में भी दस वर्षों से चल रहे इस गोरखधंधे का पर्दाफाश क्यों नहीं किया गया? जिस कारण ऑडिट अधिकारियों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
उधर, सहायक पंजीयक अधिकारी रमेश शर्मा ने बताया कि अपना नाम चमकाने के लिए कुछ सहकारी सभाओं ने नियमों को ताक पर रख कर लोनिंग की है। जिसका खामियाजा उनको भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गडबड़ी करने वालों को कतई बख्क्षा नहीं जाएगा।