आरोपी बिना नंबर की बाइक पर सवार थे और कोई प्रत्यक्षदर्शी भी नहीं था। पुलिस के लिए यह मामला चुनौतीपूर्ण था। इस मामले में काफी फजीहत भी हुई थी। पुलिस महानिदेशक सीता राम मरडी ने स्वयं बद्दी आकर अफसरों को लताड़ लगाई थी।
आईजी आसिफ जलाल भी कई दिनों तक बद्दी में डटे रहे। आरोपियों को पकड़ने का जिम्मा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर लखवीर सिंह को सौंपा गया था। वीरवार को पुलिस टीम चारों आरोपियों को पकड़ कर रात करीब साढ़े 11 बजे बद्दी पहुंची।
एसपी रानी बिंदु सचदेवा ने बताया कि वारदात में दो नहीं, चार लोग शामिल थे। इनमें से एक आरोपी जगदीप खान उर्फ जग्गा बागवानियां में एल्यूमीनियम फेब्रिकेशन की दुकान करता है जबकि दूसरा आरोपी सुखवीर उसके पास काम करता था। दोनों एक माह से कलेक्शन एजेंट की रेकी कर रहे थे। उन्होंने रोपड़ के रहने वाले हरदीप और मेजर सिंह से इसका जिक्र किया और सभी ने एजेंट को लूटने की योजना बनाई।
वारदात के दिन जगदीप को छोड़ कर तीनों आरोपी दो बाइकों पर लाल चंद का पीछा करते हुए आए और संडोली में मेजर सिंह ने उस पर गोली दागी। बैग छीन कर मलकूमाजरा से होते हुए पंजाब में प्रवेश कर गए। पुलिस को इसका सुराग रास्ते में लगे कुछ निजी सीसीटीवी कैमरों से मिला और उसके बाद कड़ी से कड़ी जुड़ती गई।
एसपी ने बताया कि इस मामले में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं। इनमें से दो आरोपी हरदीप और मेजर सिंह तो पंजाब में जेल भी बंद रहे हैं। यहीं पर उनकी दोस्ती हुई। हरदीप एक मामले में दस साल की सजा काट कर रहा है और अभी बेल पर चल रहा है।
उन्होंने इस मामले को सुलझाने के लिए बद्दी के थाना प्रभारी इंस्पेक्टर लखवीर सिंह सहित हेड कांस्टेबल पवन, राजेश, कांस्टेबल शेखर, धर्मवीर, किशोरी, भूपेंद्र और सिरमौर के कांस्टेबल अमरेंद्र व प्रदीप के अलावा सब इंस्पेक्टर संजय व प्रदीप और एएसआई देवराज की अहम भूमिका रही।