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ये किस मामले में फंस गए हिमाचल के पूर्व सीएम !

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विजिलेंस ने पूर्व आईपीएस एएन शर्मा के केस में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और पूर्व गृह सचिव डा. पीसी कपूर को लपेट दिया है। मंगलवार देर शाम दर्ज एफआईआर में इन दोनों का उल्लेख इनके पदों से हुआ है।
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धूमल के लिए ‘दि देन चीफ मिनिस्टर’ और पीसी कपूर के लिए ‘दि देन सेक्रेटरी होम’ शब्दों का प्रयोग एफआईआर में है। केस आईपीसी की धारा 420, 120 बी और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2) के तहत दर्ज हुआ है।

इन पर धोखाधड़ी और षड़यंत्र रचकर लाभ लेने या देने का आरोप है। मामले की आगामी जांच एसपी सोलन एवं विजिलेंस का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे रमेश छाजटा को दी गई है।
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पूर्व सीएम और पूर्व स‌चिव होंगे नामजद!

केस में चार्जशीट पेश करने से पूर्व धूमल और कपूर का नाम भी एफआईआर में सीधे जुड़ सकता है। इस केस की जांच रिपोर्ट में इन तीन लोगों पर ही एफआईआर की सिफारिश की गई थी।

आरोप है कि पूर्व सरकार ने बीजेपी टिकट के लिए लाइन में लगे पूर्व आईजी एएन शर्मा को नियमों के विरुद्ध सरकारी सेवा में बहाल कर दिया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार आईजी को बहाल करने को लेकर सरकार के पास शक्तियां ही नहीं थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने डीओ नोट पर गृह सचिव ने ये फैसला लिया है।
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यह है मामला?

कांग्रेस सरकार ने इसे खारिज कर दिया। लेकिन कुछ महीने बाद हिमाचल में सरकार बदल गई और भाजपा सरकार ने उन्हें बहाल कर दिया गया। तब वह शिमला नगर निगम में कमीशनर थे। शर्मा 30 नवंबर 2011 को रिटायर भी हो चुके हैं।

जांच एजेंसी के मुताबिक सितंबर 2007 में एएन शर्मा ने डीआईजी रहते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए सरकार को नोटिस दिया। 16 नवंबर को सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी कि 21 नवंबर 2007 से एएन शर्मा को सेवानिवृत समझा जाए।

तत्कालीन कांग्रेस सरकार 2007 को ये आवेदन नामंजूर कर दिया। इसके बाद एएन शर्मा 31 दिसंबर को कैट में चले गए। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अपना पक्ष भी रखा।
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