कमेटी में ऊना परिवहन निगम के ट्रैफिक मैनेजर दर्शन सिंह और अकाउंटेंट राजेश पाल को सदस्य बनाया। 23 मई, 2017 को दलजीत ने एचआरटीसी के किराएदार अशोक कुमार को मृत घोषित कर उसकी फर्जी सूचना विभाग के मुख्य कार्यालय शिमला को भेजी, जबकि ऊना बस अड्डे की दो दुकानों और एक कैंटीन का करीब 62 लाख रुपये उससे वसूलने को बकाया था।
परिवहन मजदूर संघ ने इस षड्यंत्र की लिखित शिकायत सरकार को दी। जांच में अशोक जिंदा पाया गया। दलजीत को गुमराह करने और निगम को लाखों का चूना लगाने के आरोप में 10 अगस्त, 2018 को निलंबित कर दिया। निगम के लाखों रुपये के टायर और स्पेयर पार्ट घोटाले में भी वह मुख्य आरोपी रहा है। मामले में शिमला में जीरो एफआईआर हुई थी, जिसे अब ऊना थाने में शिफ्ट कर दिया है।