नंबर के लिए हैकर ने जो दस्तावेज सर्विस सेंटर में दिए हैं उन पर होटल मालिक के फर्जी हस्ताक्षर हैं। दोनों दस्तावेजों पर एक ही व्यक्ति के साइन हैं। इसके बाद हैकर ने दो डुप्लीकेट नंबर हासिल करने के बाद ठगी की वारदात को अंजाम दिया। इस दौरान जब हैकर ने बैंकों से पैसा निकाला तो ओटीपी उसके डुप्लीकेट नंबर पर गए जिससे वह आसानी से वारदात को अंजाम दे गया।
होटलियर को जब तक पता चला तब तक खाते से 33 लाख रुपये उड़ चुके थे। हैकर ने लाखों की यह रकम चार खातों में ट्रांसफर की है। लेकिन सवाल उठता है कि आधार कार्ड कैसे फर्जी बनाया गया, इसके अलावा अगर आधार कार्ड का नंबर गलत था तो मोबाइल का डुप्लीकेड नंबर जारी करते वक्त इसे चेक क्यों नहीं किया गया?
डीएसपी हेडक्वार्टर प्रमोद शुक्ला ने बताया कि पुलिस जांच कर रही है। जल्द ही शातिर हिरासत में होंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। आरोपियों तक पहुंचने के लिए टेक्निकल तौर पर जांच की जा रही है।