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गैंगरेप की अफवाह फैलाने वाली महिला को किया नजरबंद!

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कथित गैंगरेप मामले को लेकर अमर उजाला में शिकायतकर्ता लापता शीर्षक से खबर छपने के बाद आनन-फानन में पुलिस महिला को लेकर लंज रोड पर स्थित उसके ससुराल पहुंच गई। हालांकि, शिकायतकर्ता के साथ आई महिलाओं ने खुद को महिला आयोग की सदस्य बताया लेकिन सूत्रों के अनुसार उनमें सादी वर्दी में कई पुलिस महिला कर्मचारी भी थीं।
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यहां शिकायतकर्ता महिला के साथ मीडिया को बातचीत नहीं करने दी गई। कुछ समय के बाद महिला को वापस ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार पुलिस महिला को हिरासत में नहीं ले सकती। उससे सिर्फ पूछताछ कर सकती है। पुलिस ने शिकायतकर्ता महिला को वीरवार से अघोषित रूप से पुलिस हिरासत में ले रखा है। यानी, उसे नजरबंद किया गया है।

पैसों के लिए झूठ बोलने का शक

एसआईटी टीम को शक है कि अगर महिला को ससुराल या मायके में भेजा गया तो वह उसे चकमा दे सकती है। उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता महिला ने पुलिस को बुरी तरह उलझाकर रख दिया है। महिला बार बार बयान बदल रही है। एसआईटी जब भी महिला के बयान पर किसी चीज को वेरिफाई करने जा रही है तो वह झूठी निकलती है।

शिकायतकर्ता की अभी तक खंगाली गई कॉल डिटेल में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। इससे कहीं भी यह साबित नहीं हो रहा कि इसके पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र रचा गया था। एसआईटी की अभी तक की जांच में कथित गैंगरेप मामले में राजनीतिक साजिश होने की बात भी इंकार कर रही है। एसपी कांगड़ा कपिल शर्मा ने बताया कि मामले का जल्द ही पटाक्षेप कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता महिला अपने ससुराल में है।

पैसों के लिए झूठ बोलने का शक
शिकायतकर्ता महिला बेहद गरीब परिवार से संबंद्ध रखती है। उसका मायका और ससुराल पक्ष गरीबी की जद में है। वहीं, शिकायतकर्ता का बार बार गायब होना उसकी रूटीन में है। महिला के कई बार गायब होने की पुलिस में भी शिकायतें दर्ज हैं। ऐसे में शुरूआती जांच यह भी माना जा रहा है कि शिकायतर्का महिला ने पैसों के लिए ही सारा झूठ बोला होगा। हालांकि, एसआईटी सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है।

शरारती तत्वों ने पोस्ट किया था एक साल पुराना फोटो

धर्मशाला में कथित गैंगरेप मामले की जांच की आंच आईजीएमसी अस्पताल शिमला तक पहुंच गई है। पिछले दिनों व्हाट्स ऐप और फेसबुक पर शरारती तत्वों ने एक फोटो पोस्ट कर विवाद को हवा दे दी कि लड़की की आईजीएमसी में मौत हो गई है। संबंधित फोटो में लड़की अस्पताल के बिस्तर पर लेटी है। उसे डॉक्टर देख रहे हैं और प्रदेश के मुख्यमंत्री भी वहां नजर आ रहे हैं।

शरारती तत्वों ने यह मैसेज लिखा था कि इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा आगे पोस्ट करें। ऐसे में जैसे ही यह फोटो सर्कुलेट हुआ, आईजीएमसी में फोन घनघनाने लगे। अपने स्तर पर की गई जांच में पता चला कि यह फोटो 18 जून 2014 के हैं। यह लड़की सड़क हादसे में घायल हुई थी इसके अलावा कई और लोग भी घायल हुए थे। इन्हीं का कुशलक्षेम पूछने के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आईजीएमसी आए थे।

शरारती तत्वों ने इतनी पुरानी फोटो को उठाकर कथित गैंगरेप से जोड़ दिया। इस तरह की हरकतें करने वालों की पुलिस तलाश कर रही है। उधर, आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि यह फोटो हादसे में घायल लड़की की है जो बीते साल 18 जून की है। शरारती तत्वों की इस हरकत से प्रबंधन को भी काफी परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि यह महज कोरी अफवाह थी, जो पुलिस जांच में भी सामने आ गई है।
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नहीं होगी कोई भी गिरफ्तारी

कानून के जानकारों की मानें तो कथित गैंगरेप मामले में कोई गिरफ्तारी हो ही नहीं सकती है। दरअसल, यह सारा मामला बनता ही मानहानि का है। मानहानि मामले में आईपीसी की धारा 500 के तहत ही सजा हो सकती है। लेकिन, इसमें जमानत हो जाती है। वहीं, सीआपीसी की धारा 199 के तहत ऐसे मामलों में कोर्ट ही संज्ञान ले सकता है। वह भी तब जब पीड़ित शिकायत दर्ज कराए। लेकिन, अभी तक इस मामले में कोर्ट में किसी ने भी शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

एसआईटी के हाथ खड़े
सोशल मीडिया में अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई करने में एसआईटी असमर्थ हो गई है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी के पास ऐसे आधुनिक उपकरण ही नहीं है जिनसे यह पता लगाया जा सके कि सोशल मीडिया में अफवाह किसने फैलाई। एसआईटी तो कंप्यूटर के आईपी एड्रेस तक पता करने में असमर्थ है। ऐसे में सोशल मीडिया में अफवाह फैलाने वाले लोगों की जांच शिमला में बने हाईटेक सेल में की जा रही है।
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