लेह-लद्दाख में जिस मोस्ट वांटेड संदिग्ध व्यक्ति को इंटेलिजेंस एजेंसी ढूंढ रही थी, सीआईडी ने उसे मैकलोडगंज में दलाईलामा मंदिर से करीब आधा किलोमीटर दूर दबोच लिया। पूछताछ में यह संदिग्ध व्यक्ति खुद को तिब्बती मूल का बता रहा है।
लेकिन, इसके पास जरूरी दस्तावेज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) नहीं मिला है। संदिग्ध के पास एक बैग मिला है लेकिन उसमें उसकी पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं हैं। पूछताछ में यह संदिग्ध व्यक्ति सुरक्षा एजेंसियों को गोलमोल जवाब दे रहा है।
पूछताछ के दौरान व्यक्ति ने अपना नाम फुरबू डोंडुप (37) बताया है। उसने बताया कि वह लेह जिला के डुंगटी गांव में रहता है। डाकखाना और तहसील का नाम पूछने पर वह कुछ भी नहीं बता रहा। जांच के बाद संदेह जताया जा रहा है कि ये चीनी जासूस भी हो सकता है। इसकी पहचान को वेरीफाई किया जा रहा है।
इंटेलिजेंस एजेंसी को थी तलाश
सुरक्षा एजेंसी ने जब लद्दाख सेटलमेंट के अफसर से संदिग्ध व्यक्ति के बारे में बात की तो पता चला कि इस संदिग्ध को वहां की इंटेलिजेंस एजेंसी ढूंढ रही है। हालांकि इसकी किस केस में तलाश चल रही थी, इसका पता अभी नहीं चला हैं। जांच एजेंसी अभी कुछ भी बताने से इंकार कर रही है।
सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष ज्यादा समस्या तिब्बती मूल के संदिग्ध व्यक्ति की सही पहचान पता लगाने की है। पूछताछ के दौरान संदिग्ध व्यक्ति पर जासूस होने का शक भी गहरा रहा है। उधर, सीआईडी के इंस्पेक्टर भगवंत सिंह ने मैकलोडगंज में बिना आरसी तिब्बती मूल के व्यक्ति के पकड़े जाने की पुष्टि की है।
पूछताछ में दी ये जानकारी
पूछताछ के दौरान इस संदिग्ध व्यक्ति ने सुरक्षा एजेंसी को बताया कि टूटू (तिब्बतियन फौज) में 1992 से 2000 तक सैनिक रह चुका है। इस दौरान उसने उत्तर प्रदेश में भी सेवाएं दी हैं। इसके बाद वह नौकरी से भाग आया।
पिता रहता है नेपाल में
सुरक्षा एजेंसी को पूछताछ में तिब्बती मूल के संदिग्ध व्यक्ति ने बताया कि उसका पिता नेपाल में वृद्धाश्रम में रहता है। उसके चार बच्चे हैं। मां, पत्नी और जन्मतिथि के बारे में पूछने पर वह चुप रहा।
यह संदिग्ध व्यक्ति कई दिनों से दलाईलामा मंदिर से आधा किलोमीटर दूर जोगीवाड़ा रोड के आसपास घूम रहा था। इसने मैकलोडगंज स्थित जोगीवाड़ा रोड पर तिब्बतियन रिसेप्शन सेंटर में शरण ले रखी थी। इस तिब्बतियन रिसेप्शन सेंटर में अक्सर शरणार्थियों को ठहराया जाता है।