जिसमें एचएचओ विजय, सहायक एसएचओ योगेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल जकीर, अमरिंद्र आदि शामिल रहे। शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों से मामले का पटाक्षेप करने में सबसे अधिक सहायता मिली।
डेथ सर्टिफिकेट लेने की जल्दबाजी में भतीजा रवि जब नाहन पहुंचा तो उससे गहनता से पूछताछ कर गिरफ्तार कर लिया गया। जिसके बाद इस पूरे मामले का खुलासा हो गया।
एएसपी वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि पुलिस की तफ्तीश को भटकाने के लिए बाकायदा मुख्य आरोपी ने खुद को ही जान का खतरा बताकर एक पत्र भी वायरल किया था। इसके मुताबिक वो देहरादून जा रहा था।
हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद आकाश विदेश जाने की फिराक में था। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि आकाश की बेटी यूरोपियन देश साइप्रस में पढ़ाई कर रही है।
बेटा पंजाब विश्वविद्यालय का छात्र है। पुलिस को उसके नेपाल या फिर साइप्रस जाने का शक था। लिहाजा, उसे दबोचने के लिए जाल बिछाया गया और बिहार-उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित जलालपुर में उसे दबोच लिया गया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि आकाश ने स्विफ्ट कार (पीबी65-3372) में मजदूर राजू को बिठाया था, जबकि पीछे सैंट्रो कार (एचआर03-3504) में 28 वर्षीय भतीजा रवि मौजूद था। वारदात को अंजाम देने से पहले यह दोनों कारें नाहन शहर में देखी गईं।
अत्याधुनिक कैमरों में दोनों ही कारों में एक या दो मिनट का अंतर होने से पुलिस का शक और मजबूत हो गया। वारदात के मुख्य आरोपी आकाश कुमार नेपाल पहुंचने की फिराक में था।
पुलिस को आकाश के अवध तूफान एक्सप्रेस में लखीसराय से गंगानगर में सवार होने की सूचना मिली। ट्रेन अपने रूटीन टाइम से दो से तीन घंटे लेट थी। इसके पलवल पहुंचने से पहले ही स्थानीय रेलवे पुलिस की मदद से उसे रेलवे स्टेशन पर दबोच लिया गया।
डीएनए टेस्ट में की आनाकानी
एएसपी वीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि दुर्घटना के बाद परिजनों ने आकाश के रूप में उसकी शिनाख्त कर दी थी। पुलिस तमाम जांच के दौरान औपचारिकताएं पूरी करने के बाद डीएनए जांच करवाने वाली थी। लेकिन, परिजन डीएनए जांच में भी आनाकानी करने लगे। इससे पुलिस को मामले के संदिग्ध होने का शक गहरा गया।
धन के लोभ में मानवीय संवेदनाएं भुलाकर पेशे से ठेकेदार आकाश वहशीपन पर उतर आया। उसने अपने ही मजदूर को ऐसी दर्दनाक मौत दी कि देखना तो दूर सुनने वालों की रूह भी कांप जाए।
पुलिस थ्योरी के मुताबिक पंजाब में बड़े-बड़े बिल्डरों के साथ ठेकेदारी करने वाले आकाश ने न केवल अपनी मौत, बल्कि अपने क्रियाकर्म तक की स्क्रिप्ट लिख डाली थी। मजदूर की बेरहमी से हुई हत्या को दुर्घटना का रूप दिया और फिर अपनी ही मौत का स्वांग रच दिया।
यहां तक कि परिवार के लोगों ने मृतक मजदूर राजू की आकाश के रूप में शिनाख्त कर मृत्यु के बाद निभाए जाने वाले अंतिम संस्कार भी करवा दिए। 14 दिनों के बाद लोगों व सगे संबंधियों को भोग भी खिलाया गया। एएसपी वीरेंद्र ठाकुर ने इसकी पुष्टि की है।
हालांकि, परिवार के लोग इस षड्यंत्र में शामिल थे या नहीं। फिलहाल इसका पता नहीं चला है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है। नाहन से लगभग पांच किलोमीटर दूर कालाअंब-पांवटा सड़क मार्ग पर जुड्डा का जोहड़ के पास 19-20 की रात बर्निंग कार मामले में जिंदा जले शख्स की मौत किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं थी।
राजस्थान के गरीब परिवार के बेटे राजू को पहले शराब पिलाना। फिर गला घोटकर अधमरा करना और फिर तारपीन का तेल छिड़ककर जला देने वाली वारदात रौंगटे खड़े करने वाली है। राजू हत्याकांड के इस मामले में पूरे परिवार की भूमिका संदेह के घेरे में है।
लिहाजा, पुलिस फूंक-फूंककर कदम रख रही है। इस मामले में परिवार के लोगों से भी पुलिस गहन-पूछताछ कर सकती है। वहीं, गिरफ्तारियों से भी इंकार नहीं किया जा सकता।