इक्डोल के नवंबर में किए गए ऑडिट में एजी की टीम ने ऑडिट पैरा में प्रोस्पेक्टस बिक्री में घोटाले की रिपोर्ट बनाकर विवि को लिखित में सूचित किया। पैरा में एजी टीम ने 2011 से पूर्व कर्मी की सीट पर तैनाती के दौरान भी प्रोस्पेक्टस बिक्री की राशि में गड़बड़ी का पता लगाने को अपने स्तर पर जांच करने के लिए कहा। इसके बाद कुलसचिव ने आरोपी को निलंबित कर दिया और इक्डोल निदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच कमेटी बनाई। कमेटी ने कुलसचिव को सौंपी रिपोर्ट में कर्मी बाबूराम को जिम्मेदार माना।
काउंटर पर 2011 से तैनात था आरोपी
कुलसचिव की शिकायत के मुताबिक आरोपी कर्मचारी इक्डोल के प्रोस्पेक्टस काउंटर पर 2011-12 से 2017-18 तक तैनात था। इस दौरान प्रोस्पेक्टस की सेल में 1 करोड़ 11 लाख 67 हजार का घोटाला किया। प्रोस्पेक्टस की छपाई, बिक्री से लेकर इसकी आय बैंक में जमा करवाने तक की प्रक्रिया में बहुत से लोग शामिल होते हैं। यूनिवर्सिटी का अपना लोक ऑडिट विभाग भी है, जो हर साल ऑडिट करता है। सवाल उठता है कि एलएडी की नजर में यह एक करोड़ का घोटाला क्यों सामने नहीं आया?