यूको बैंक की माल रोड की मुख्य शाखा से पुराने नोटों से भरे ट्रंक को लेकर फरार हुए आरोपी के पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने चुराए हुए पैसों से अपने पैतृक गांव में 20 लाख रुपये का मकान बना डाला।
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नोटबंदी के बाद पुराने नोटों की समयसीमा पूरी होने पर आरोपी ने करीब 13 लाख रुपये नदी में बहा दिए। वहीं करीब साढ़े छह लाख आरोपी के बैंक खाते में पाए गए, जिन्हें पुलिस ने सीज कर दिया है। पुलिस ने आरोपी को पूछताछ के लिए तीन दिन के लिए पुलिस रिमांड पर लिया है।
पिछले साल दिसंबर में करसोग के जुड गांव के नार सिंह ने बैंक से एक करोड़ से अधिक रकम चुरा ली थी। इनमें से 68 लाख कुछ दिनों बाद बैंक के बाहर फेंककर चला गया था। अब पुलिस को आरोपी से करीब 40 लाख की रकम रिकवर करनी बाकी है।
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20 लाख रुपये से मकान बना तक बना डाला
रकम रिकवर करने के लिए पुलिस उसके नए मकान समेत उसकी प्रापर्टी को सीज कर उसे अटैच करेगी। नार सिंह दस महीनों से अपने गांव में ही था। दस महीनों के भीतर आरोपी ने करीब 20 लाख रुपये से मकान बना तक बना डाला। दो महीने से आरोपी नार सिंह पर स्मार्ट पुलिस निगरानी रख रही थी। आरोपी ने शुरुआती पूछताछ में अपना गुनाह कबूल कर लिया है।
पैसे रिकवर करने के लिए अटैच करेंगे प्रापर्टी
एसपी सौम्या सांबशिवन ने बताया कि बैंक से पैसों का ट्रंक चोरी करने वाले आरोपी से पैसों को रिकवर करने के लिए उसकी सारी प्रापर्टी अटैच की जाएगी। उन्होंने बताया कि आरोपी ने करीब 20 लाख का मकान बनाया है, उसे भी अटैच किया जाएगा।
वही बिलासपुर में नौकरी के नाम पर एक निजी संस्था ने सैकड़ों युवाओं से करोड़ों की ठगी का मामला सामने आया है। दिल्ली की इस संस्था ने पहले तो नौकरी के नाम पर आवेदन फीस वसूली और इसके बाद फ्रेंचाइजी के नाम पर भी युवाओं से हजारों रुपये की रकम ऐंठी गई।
कंपनी का ऑफिस जिला ऊना में खोला गया था। जबकि साक्षात्कार के लिए बिलासपुर के लक्ष्मी नारायण मंदिर में युवाओं को बुलाया गया था। ठगी का शिकार होने वाले ऐसे लोग भी है जो अधिक पैसे के लालच में अपनी नौकरी तक छोड़ कर संस्था से जुड़े थे।
शनिवार को बिलासपुर में पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए विपिन कुमार रमा देवी, संजय कुमार, पुनम शर्मा, ममता कुमारी, मिनल, हेमंत कुमार और देवेंद्र नम्होल ने बताया कि कंपनी ने उन्हें नौकरी देने के नाम पर ठगा है। लोगों ने बताया कि कंपनी ने उन्हें बताया कि उनका कार्यक्रम प्रदेश भर में चलेगा। लोगों ने संस्था में नौकरी के लिए 500 रुपये का फार्म भर कर आवेदन किया।
इसके बाद युवाओं का बिलासपुर के विश्वकर्मा मंदिर में साक्षात्कार लिए गए। इसके बाद कंपनी ने प्रदेश भर में 108 लोगों को फ्रैंचआईजी दी है। जबकि 15000 युवाओं से 500 रुपये आवेदन के रूप में लिए गए हैं। इसके बाद कंपनी ने युवाओं से 20 हजार से लेकर 34700 रुपये तक वसूल किए। जबकि राज्य स्तर और जोनल स्तर पर फ्रैंचआइजी की फीस इससे अधिक थी।
लोगों को बताया गया की संस्था का एक समाचार पत्र भी है। संस्था ने युवाओं को 10 हजार से 90 हजार रुपये तक वेतन देने की बात कही थी। विपिन ने बताया कि उन्होंने नौकरी छोड़कर संस्था को ज्वाइन किया था।
इसकी वजह यह थी कि संस्था में इससे पहले कई नामी लोग जुड़ चुके थे। संस्था ने उन्हें 90 हजार वेतन देने की बात की थी। मगर वो आज तक नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कंपनी ने ऊना ऑफिस के लिए 35.50 लाख के दो चेक के अलावा 6.50 लाख रुपये के चेक भी जारी किए थे।
मगर वह भी बाउंस हो गए। इस संबंध में कंपनी को लीगल नोटिस भी जारी किया गया है। पत्रकारों से बात करते हुए अधिवक्ता प्रवेश चंदेल ने बताया कि कंपनी ने लोगों को ठग कर पैसा जमा किया है।
वहीं कंपनी के खिलाफ एसपी बिलासपुर, विजिलेंस और पीएमओ दिल्ली में इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई जाएगी। एसपी बिलासपुर अंजुम आरा ने बताया कि उनके पास अभी शिकायत नहीं पहुंची है। शिकायत मिलते ही इस संबंध में कड़े कदम उठाए जाएंगे।