केसीसी बैंक में पिछले पांच वर्षों में स्वीकृत 336 में से 294 लोन के मामलों में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की परतें सामने आने लगी हैं। गलत ऋण की फाइल पर हस्ताक्षर न करने पर केसीसी बैंक में एमडी को ट्रांसफर करने का खेल चलता रहा। सूत्रों के अनुसार इसका शिकार पहले तत्कालीन एमडी राखिल काहलो शिकार हुईं। सूत्रों की मानें तो एक होटलियर के 65 करोड़ रुपये के गलत लोन की फाइल पर हस्ताक्षर न करने पर काहलो को ट्रांसफर झेलनी पड़ी। इसके बाद इसी फाइल पर जब एमडी पीसी अकेला ने हस्ताक्षर नहीं किए तो उनकी भी ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू हो गई, लेकिन चुनाव के दौरान आचार संहिता लगने सेे वह बच गए। कायदे से इस होटलियर को नाबार्ड की मंजूरी के बिना 40 लाख रुपये से ज्यादा का ऋण नहीं मिल सकता था।
बैंक के 136 करोड़ दबाकर बैठे आठ लोग
आठ ऋणधारक केसीसी बैंक का 136 करोड़ दबाकर बैठे हैं। इनमें से सात ऋणधारकों के व्यक्तिगत खाते हैं, जिन्हें केसीसी बैंक ने नाबार्ड की मंजूरी बिना लोन बांट दिया। ऊना की एक संस्था वर्ष 2013 से करीब 70 करोड़, हमीरपुर का एक व्यक्ति वर्ष 2008 से 12 करोड़, धर्मशाला के चड़ी का एक ठेकेदार वर्ष 2009 से करीब सवा 3 करोड़, सिद्धबाड़ी का एक होटलियर वर्ष 2016 से 9 करोड़, पालमपुर का एक होटलियर वर्ष 2013 से करीब 28 करोड़, जसूर का एक डिफाल्टर वर्ष 2010 से करीब तीन करोड़, हमीरपुर के टौणी देवी का एक शख्स वर्ष 2009 से करीब 5 करोड़ और ऊना का एक डिफाल्टर वर्ष 2009 से करीब 7 करोड़ का लोन वापस नहीं दे रहा है। आरबीआई के निर्देश के बाद अनियमितताओं पर रोक: एमडी
केसीसी बैंक के एमडी पीसी अकेला ने कहा कि सितंबर 2017 में आरबीआई ने पत्र जारी कर सख्त निर्देश दिए कि लोन देने को लेकर अनियमितताओं पर रोक लगाएं। हमने आरबीआई के दिशा-निर्देशों को लागू कर दिया है।