हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड की भर्तियों में धांधली के बहुचर्चित मामले में आरोपी बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन एसएम कटवाल को सरेंडर करने के लिए सात वारंट जारी हो चुके हैं, लेकिन अब तक वह पुलिस के हाथ नहीं लग पाए हैं। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
पहली बार कोर्ट ने 24 सितंबर तक कोर्ट में सरेंडर करने का समय दिया था, लेकिन निर्धारित अवधि तक कटवाल ने सरेंडर नहीं किया। इसके बाद हर माह सरेंडर करने की तारीख मिल रही है, लेकिन दोषी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। चयन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एसएम कटवाल को कोर्ट ने पहली बार 26 सितंबर तक सरेंडर करने के लिए वारंट जारी किए दिए थे, लेकिन कटवाल ने सरेंडर नहीं किया।
बाद में 18 अक्तूबर तक सरेंडर करने के लिए वारंट जारी किया था। 18 अक्तूबर को भी सरेंडर नहीं किया तो विजिलेंस ने दोबारा कोर्ट में अपना पक्ष रखा। इसके बाद हमीरपुर कोर्ट ने 15 नवंबर तक वारंट जारी कर सरेंडर करने के आदेश दिए। इस दौरान भी सरेंडर नहीं करने पर कोर्ट ने 15 दिसंबर तक सरेंडर करने को वारंट जारी किए।
15 दिसंबर तक भी सरेंडर न होने पर कोर्ट ने 13 जनवरी, फिर 13 फरवरी, 13 मार्च तक सरेंडर करने को वारंट जारी किए थे। 13 मार्च को कोर्ट ने दोबारा वारंट जारी कर दिए हैं। हैरत की बात तो यह है कि सात बार वारंट जारी होने के बावजूद विजिलेंस कटवाल का कोई सुराग नहीं लगा पाई है, जबकि मामले के तीन अन्य आरोपी जेल पहुंच चुके हैं।
इनमें से एक दोषी तत्कालीन बोर्ड सदस्य डा. विद्यानाथ ने 24 सितंबर को कोर्ट में सरेंडर किया था। वहीं शारीरिक शिक्षक राकेश छाबड़ा को विजिलेंस ने चंबा और टीजीटी के लिए चयनित मदन गोपाल को विजिलेंस ने ऊना से गिरफ्तार किया था। उधर, एएसपी विजिलेंस बलबीर सिंह का कहना है कि कटवाल का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। दबिश दी जा रही है। जल्द ही मामले की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी।