शिमला के रामपुर में लघु बचत के नाम पर उपभोक्ताओं को करीब 50 लाख रुपये की चपत लगाई है। लघु बचत योजना के तहत स्थानीय लोगों और दुकानदारों से एक महिला एजेंट और उसके पति ने लाखों रुपये की राशि एकत्र की और इसे डाकघर में जमा नहीं करवाया।
यह राशि कहां गई, इसका लेखा जोखा डाकघर में नहीं है। आरोप है कि लोगों से पैसे लेने के बाद कार्ड और पासबुकों में भी एंट्री की गई। इसका पता तब लगा जब उपभोक्ताओं ने रामपुर डाकघर में संपर्क किया। रामपुर के 11 उपभोक्ताओं ने महिला एजेंट और उसके पति के खिलाफ पुलिस में धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया है।
पिछले कई सालों से स्थानीय महिला एजेंट बिंदुबाला और उसके पति जय किशन लघु बचत के नाम पर रामपुर में लोगों से रुपये एकत्र करते रहे। उपभोक्ताओं ने दोनों पर विश्वास कर उनके पास खाते खुलवाए और थोड़ी-थोड़ी बचत रुपये जमा करवा रहे थे।
इन लोगों ने जब महिला एजेंट से लघु बचत का ब्यौरा मांगा तो वह टालमटोल करती रही। लोगों को जब लंबे समय तक राशि ब्याज सहित नहीं मिली तो उनका माथा ठनका। इसके बाद कुछ उपभोक्ताओं ने संबंधित डाकघर से भी संपर्क किया तो वहां पता चला कि उनके नाम से राशि लघु बचत खातों में जमा ही नहीं की गई।
कृष्ण गोपाल, हितेंद्र गुप्ता, अशोक नेगी, लोकेंद्र सिंह भंडारी, अंकुश भारद्वाज, हीरा लाल, नरेश कुमार, शांति नेगी, प्रेम सिंह नेगी, दीप राम और रूप लाल ने शुक्रवार को पुलिस में मामला दर्ज करवाया।
मामले की छानबीन कर रही पुलिस
थाना प्रभारी संजीव कुमार ने बताया कि पुलिस ने बिंदुबाला और उसके पति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 408 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। उधर, निदेशक लघु बचत हंसराज शर्मा ने बताया कि इस संबंध में उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है। गबन के इस मामले की शिकायत पुलिस में की जा सकती है, वहीं से कार्रवाई होगी।