हिमाचल के ऊना में एक धार्मिक संस्थान में माथा टेकने आए एक बच्चे को तीन पुजारियों ने बंधक बना लिया। इसके मुंह में लिफाफे ठूंस दिए। बाद में लोगों ने इसे छुड़ाया। जानकारी के अनुसार धार्मिक संस्थान में माथा टेकने पहुंचे तेरह साल के एक बालक को तीन पुजारियों ने बंधक बना डाला।
बालक के मुंह में पॉलिथीन के लिफाफे ठूंस दिए। संस्थान के हॉल में ही इसके हाथ और पैर धोती से बांध दिए। जब इलाके में खबर फैली तो गुस्साए ग्रामीणों ने तीनों पुजारियों को बुरी से पीट दिया। वारदात के बाद यहां तनाव का माहौल पैदा हो गया है।
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्जकर हिरासत में ले लिया है। पुजारियों ने ऐसी हरकत क्यों की, इसका खुलासा नहीं हो सकता है। पुलिस जांच में जुट गई है।
बालक ने बताई पूरी कहानी
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक क्षेत्र के ही एक गांव का तेरह वर्षीय बालक साइकिल पर सवार होकर धार्मिक संस्थान में माथा टेकने के लिए घर से निकला। इसी बीच तीनों पुजारियों ने बालक को पकड़ लिया और हॉल में ले गए।
जब वो चीखने लगा तो पुजारियों ने लिफाफे उसके मुंह में ठूंस दिए और हाथ-पैर बांध दिए और संदूक के पीछे छिपा दिया। शाम तक जब बालक घर नहीं पहुंचा तो उसकी तलाश शुरू की गई। जब ग्रामीण धार्मिक संस्थान के बाहर पहुंचे तो बच्चे की साइकिल और चप्पल वहां पड़ी थी।
जब लोग अंदर गए तो बच्चा हॉल में संदूक के पीछे पड़ा था। इस बीच पुजारी कहते रहे कि अंदर कुछ नहीं है। जब लोगों ने बालक को उस हालत में देखा तो वे भड़क गए। बालक के मुंह से लिफाफे निकालने के बाद पूछा गया तो उसने कहा कि पुजारियों ने उसे बंधक बना लिया था।
लोगों ने पीट डाले पुजारी
इस ग्रामीणों ने पुजारियों को घेर लिया और उनकी पिटाई कर दी। पुलिस को सूचित किया गया। आरोपी पुजारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई न होने से नाराज लोग थाना पहुंच गए। इसके बाद पुलिस ने तीन पुजारियों को हिरासत में लेकर मामला दर्ज कर लिया है।
हिरासत में लिए गए पुजारियों की पहचान अभिनव पराशर निवासी सेक्टर चार गुड़गांव, अशोक शर्मा निवासी रमेश नगर दिल्ली तथा राकेश शर्मा निवासी लोहारा जिला ऊना के रूप में हुई है। डीएसपी जितेंद्र चौधरी ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।