जसूर (कांगड़ा)। इंदौरा में तैनात गंगथ निवासी डॉ. अमित भल्ला जिनकी मौत पांच जून को पौंग जलाशय में डूबने से हो गई थी। डॉ. अमित भल्ला के परिजनों ने उनकी मौत को आत्महत्या न मानकर हत्या का अंदेशा जताकर पुलिस और सरकार से मौत के कारणों की जांच की गुहार की है। डॉ. अमित वर्मा के परिजनों ने जसूर में एक पत्रकार वार्ता में बताया कि डॉ. अमित भल्ला जो कि पांच जून को सुबह 8:30 बजे घर से इंदौरा को ड्यूटी के लिए निकले थे और घर से निकलते हुए उन्होंने अपने बच्चे के दूध की बोतल, अपने कपड़े और उनकी पत्नी जो आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं, को उन्हें शाम को इंदौरा आने को कहा। डॉ. अमित भल्ला के पिता सुरेंद्र भल्ला ने बताया कि डॉ. भल्ला जो अक्सर कई बार परिवार सहित अटल बिहारी वाजपेई क्रीड़ा संस्थान पौंग डैम में जाया करते थे। उस दिन भी वह वहां गए। डॉ. अमित भल्ला की गाड़ी जो उस दिन भी परिसर क्रीड़ा संस्थान में अंदर लगी हुई थी, जबकि आम तौर पर अन्य गाड़ियों को परिसर के बाहर गेट के साथ लगाया जाता था। उन्होंने कहा कि डॉ. भल्ला तैरना नहीं जानते थे। फिर भी उनके कपड़े डैम के किनारे खुले हुए मिले। जहां पर डॉक्टर अमित भल्ला की बॉडी मिली, वहां बिना बोट के नहीं पहुंचा जा सकता। वहीं उनके शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान यह इशारा करते हैं कि उनके साथ कुछ अनहोनी घटित हुई है, जबकि संस्थान का यह कहना कि डॉ. भल्ला वहां आए ही नहीं। परिजनों के अनुसार अगर डॉ. भल्ला ने आत्महत्या करनी थी तो उन्हें इतनी दूर जाने की जरूरत नहीं थी और कोई भी व्यक्ति आत्महत्या के लिए कपड़े खोलकर छलांग नहीं लगाता, जबकि उनके कपड़े वहां पर खुले हुए मिले। क्योंकि आत्महत्या का फैसला क्षणिक आवेश में लिया जाता है। परिजन उनकी मौत के लिए संस्थान ने सही जानकारी न देने का आरोप लगा रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने एसपी संजीव गांधी को एक पत्र लिखकर जल्द न्याय की मांग की है। रिश्तेदारों संदीप भल्ला, रजनीश गुप्ता, सुभाष सेठी, सुनील, रणदीप, नरेंद्र भल्ला, मखनलाल और राकेश आदि ने उनकी मृत्यु के संदर्भ में जल्द न्यायिक जांच की मांग की है।
-डॉ. भल्ला की मौत को लेकर पुलिस बारीकी से हर पहलू की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की भी जांच की जा रही है। उनके शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान या गला घोंटने के लक्षण नहीं मिले हैैं। पूरी जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। - संजीव गांधी, एसपी कांगड़ा