सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर तीन शातिरों ने 175 युवाओं से एक करोड़ रुपये की ठगी की है। ठगी का यह मामला अब कोर्ट पहुंच गया है। घुमारवीं के अतिरिक्त न्यायिक दंडाधिकारी विक्रांत कौंडल की अदालत ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और पैसा ऐंठने का आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
शातिरों ने ठगी का शिकार युवाओं को मुख्यमंत्री की अनुशंसा के दस्तावेज भी दिए हैं। इन्हें शिक्षा विभाग, सहकारी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, केसीसी बैंक, हिमाचल लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण बैंक, आबकारी एवं कराधान विभाग में नौकरी के अप्वाइंटमेंट लेटर दिए हैं। पीड़ित अप्वाइंटमेंट लेटर ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए पहुंचे तो इस फर्जीवाड़े का पता चला।
वर्ष 2015 से शुरू हुआ ठगी का सिलसिला
शिकायतकर्ता प्यारे लाल पुत्र निक्कू राम निवासी जांगला डाकघर गेहड़वीं, पवन कुमार पुत्र भागीरथ निवासी मटियाल डाकघर पटेर व अमीचंद पुत्र प्रभु राम निवासी बरोटा तहसील घुमारवीं के वकील नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि आरोपी लगभग एक करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं।
शिकायत कर्ताओं का आरोप है कि सुभाष कायस्था निवासी मशोबरा, रोहित गुप्ता निवासी कुनिहार और राजेश कुमार निवासी जमोई झंडूता ने उनसे ठगी की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ठगी का यह सिलसिला वर्ष 2015 से शुरू हुआ।
आरोपियों ने बताया कि उनकी प्रदेश सरकार, सचिवालय और मंत्रिमंडल सदस्यों से उनकी अच्छी जान पहचान है। वे सरकारी नौकरियां दिलवा सकते हैं। नौकरी के बदले में इन लोगों से आरोपियों ने भारी भरकम रकम अपने खातों में डलवा ली।
पुलिस से नहीं मिली मदद
शिकायतकर्ताओं ने आरोपियों के खिलाफ अदालत में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के तहत आवेदन किया। इसमें कहा गया कि लगभग 175 लोग इस ठगी का शिकार हुए हैं। शिकायतकर्ताओं के वकील नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि दस्तावेजों पर संबंधित विभागों के विभागाध्यक्षों की बाकायदा मोहरें अंकित हैं और हस्ताक्षर भी हैं।
ठगी का खुलासा हुआ तो आरोपियों ने शिकायतकर्ताओं के फोन उठाने बंद कर दिए। उसके उपरांत इन लोगों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई भी पुख्ता कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई जिस पर उन्होंने अदालत में यह याचिका दाखिल की। याचिका के आधार पर अतिरिक्त न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश जारी किए हैं।