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मशीनें होने के बावजूद नहीं हो सके अल्ट्रासाउंड, एक्सरे

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शिलाई में कैंपर हादसे के घायलों के दर्द को स्थानीय सामुदायिक चिकित्सा केंद्र की अव्यवस्था ने और बढ़ा दिया। एक दर्जन भर से ज्यादा घायलों को एकसाथ चिकित्सा केंद्र लाए जाने पर अफरातफरी मच गई।

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एक तरफ घायलों की चीख पुकार मची हुई थी तो दूसरी तरफ एक एक बिस्तर पर दो दो मरीज लिटाकर उपचार करना पड़ रहा था। चिकित्सा केंद्र में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे मशीन होने के बावजूद घायलों की जांच नहीं हो पाई।

केंद्र में मशीन चलाने वाले ऑपरेटर का पद अरसे से खाली पड़ा है। ऐसे में जैसे तैसे प्राथमिक उपचार देने के बाद घायलों को आनन फानन पांवटा रेफर करना पड़ा।

उल्लेखनीय है कि शिमला से शिलाई तक का इलाका सड़क हादसों के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। सामुदायिक चिकित्सा केंद्र पर न सिर्फ शिमला-शिलाई के बीच का इलाका निर्भर करता है बल्कि उत्तराखंड के मरीज भी आपात स्थिति में इसी केंद्र में लाने पड़ते हैं।
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आसपास कोई निजी अस्पताल भी नहीं है, जिसके चलते आपात स्थिति में भी घायलों और मरीजों को पांवटा भेजने की मजबूरी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड और एक्सरे मशीन ऑपरेटर समेत आपात सेवाओं से जुड़ी अन्य सुविधाओं के लिए उच्चाधिकारियाें को लिखा गया है।

मामा की शादी में झूमता रहा था विकास- शादी की खुशियां एक ही झटके में मातम में तबदील हो गईं। शिलाई में शादी की हर रस्म पर बाराती खूब झूमे थे। अपने मामा की शादी में शामिल होने हरियाणा के कुरुक्षेत्र से पहुंचे विकास की खुशी का भी ठिकाना नहीं था।

चौदह साल के विकास ने मामा की शादी में तैयारियों से लेकर बारात में जमकर धमाल मचाया। उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। बारात के साथ वापसी पर भी विकास सबसे ज्यादा खुश था। लेकिन नियति ने खुशी से झूमते विकास को मौत की नींद सुला दिया। कैंपर वाहन में सवार विकास की मौके पर ही मौत हो गई।

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