हिमाचल के चंबा में बहुचर्चित आंगनबाड़ी की बच्चियों से दुराचार मामले में डेढ़ साल सुनवाई पूरी करने के बाद न्यायालय ने आरोपी युवक को दोषी करार देते हुए दस साल कैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
अभियुक्त को भादंसं की धारा 506 के तहत भी एक साल कैद और एक हजार रुपये जुर्माना भरना होगा। जुर्माना अदा न करने की सूरत में अभियुक्त को छह माह अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। यह फैसला पदम सिंह एलडी विशेष न्यायाधीश चंबा की अदालत ने सुनाया है।
मामले की पैरवी अनिल अवस्थी उप न्यायवादी चंबा ने की। मामला मार्च 2015 का है। हिमांशु पुत्र ओमप्रकाश निवासी गांव करियां पर उसी के गांव में रहने वाले कुछ लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसने स्थानीय आंगनबाड़ी में पढ़ने वाली चार बच्चियों से दुराचार किया है।
टॉफियां देकर किया था चार बच्चियों का रेप
इसके बाद पुलिस ने हिमांशु को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। परिजनों की शिकायत पर चारों बच्चियों का मेडिकल करवाया। इसमें दुराचार की पुष्टि हुई। आंगनबाड़ी में इस तरह का मामला सामने आने के बाद सरकार के भी हाथ-पांव फूल गए थे।
लिहाजा, सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे। पुलिस जांच में सामने आया कि आंगनबाड़ी भवन दोषी हिमांशु के घर में चल रहा था। वह छोटी बच्चियों को टॉफी और अन्य खाने-पीने वस्तुओं का लालच देकर उनसे गलत हरकतें करता था। कुछ पीड़ित बच्चियों ने परिजनों से शिकायत की। उसके बाद पूरा मामला सामने आया। पुलिस ने जांच पूरी कर चालान कोर्ट में पेश किया।
आंगनबाड़ियों को घरों से बदलने के दिए थे निर्देश
आंगनबाड़ी की बच्चियों से दुराचार का मामला प्रदेश में चर्चा विषय बना रहा था। उस समय सरकार ने लोगों के घरों में आंगनबाड़ी न चलाने की हिदायत दी थी। कई आंगनबाड़ियों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया था, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में जाने के बाद आंगनबाड़ियों को शिफ्ट करने का क्रम भी टूट गया।