हिमाचल के शूलिनी यूनिवर्सिटी पहुंचे युवराज सिंह ने अपने जिंदगी से जुड़े कई राज छात्रों के साथ साझा किए। कहा कि वर्ल्ड कप के बाद वह अपनी खुशियां भी पूरी तरह से मना नहीं पाए थे। बाद में कैंसर से लड़ने में डॉक्टरों ने तो उनकी मदद की ही लेकिन एक शख्स ऐसी थी जो हर वक्त उनका हौसला बढ़ाती रही।
युवराज ने बताया कि यह उनकी मां थी जो इस जरूरत के वक्त में उनके साथ थी। मां ने हौंसला दिया तभी मैं ठीक हो पाया। कैंसर जैसी बीमारी से जल्द ठीक होने में मां की मदद और आशीर्वाद सबसे ज्यादा अहम था। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी भावना और देश के लोगों का प्यार कैंसर से लड़ने में मददगार रहा।
यूवीकैन फाउंडेशन का ऑफ साइट सेंटर लांच किया
इस दौरान युवराज सिंह ने शूलिनी विवि में अपनी यूवीकैन फाउंडेशन का एक ऑफ साइट सेंटर लांच किया। ये सेंटर शूलिनी के उन छात्रों के सहयोग से शुरू किया गया है जो यूवीकैन से साथ मिलकर कैंसर की प्रति जागरुकता फैलाने के लिए काम कर रहे हैं।
युवराज ने छात्रों के कार्य की सराहना की और भविष्य के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर शूलिनी विश्वविद्यालय ने कैंसर से ठीक हो चुके लोगों और उनके बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा की। यूवीकैन के साथ काम करने के लिए विवि ने एमओयू किया।
इससे पहले युवराज ने उनके नाम पर बने विश्वविद्यालय के नए क्रिकेट मैदान का उद्घाटन किया। उन्होंने एक कश्मीर विलो पेड़ भी लगाया गया। इस वृक्षारोपण के जरिए देश के क्रिकेट प्रेम को दर्शाने के कोशिश की गई। कश्मीर विलो से क्रिकेट बैट बनाए जाते हैं।
2012 में शुरू किया यूवीकैन
साल 2012 में युवराज ने यूवीकैन को शुरू किया। इसके जरिए कैंसर से लड़ने, इस बीमारी के बारे में जागरुकता फैलाने की पहल की गई। यूवीकैन फाउंडेशन, गैर-लाभकारी संगठन है। कैंसर का निदान हो जाने के बाद युवराज सिंह ने अमेरिका में लिवस्ट्रांग फाउंडेशन से प्रेरणा के बाद संस्था की नींव रखी थी।
ये संस्था कैंसर रोगियों और सही उपचार से वंचित लोगों के लिए धन जुटाने का काम कर रही है। यूवीकैन कैंसर से उभर चुके रोगियों के लिए पुनर्वास प्रक्रिया के माध्यम से बेहतर जीवन का निर्माण कर रहा है। शूलिनी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पीके खोसला ने युवराज का विवि में आने पर आभार जताया।