उपेक्षा के चलते 138 साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर की हालत हो रही खस्ता, रास्ते की हालत भी सही नहीं जांच रिपोर्ट में भी कई खामियों का हुआ है खुलासा संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। ब्रिटिश हुकूमत में भारत की सत्ता का केंद्र रहा शिमला का भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (एडवांस्ड स्टडी) आज बदहाली से जूझ रहा है। 138 साल पुराने इस ऐतिहासिक धरोहर भवन की दीवारों की दरारें गहरी होती जा रही हैं, छतों से पानी टपक रहा है, सीढ़ियां, रेलिंग और फर्श क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
कई हिस्सों में सीलन आ गई है। हाल ही में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की निरीक्षण रिपोर्ट में सार्वजनिक प्रवेश मार्ग का रखरखाव भी बेहद खराब पाया गया है। रिपोर्ट के साथ संलग्न तस्वीरों ने भवन की बिगड़ती हालत को उजागर किया है। निरीक्षण में सामने आया कि भवन के कई हिस्सों में लंबे समय से पानी का रिसाव हो रहा है। नमी ने दीवारों और छतों को नुकसान पहुंचाया है। कई स्थानों पर फर्श और रेलिंग टूट गई हैं, सीढ़ियां भी सुरक्षित नहीं हैं। निरीक्षण के बाद हिमाचल हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए तो यह धरोहर भवन जर्जर हो सकता है।
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अदालत ने इसे शिक्षा विभाग की उदासीनता का परिणाम भी माना। इससे जुड़ी आरटीआई कार्यकर्ता पवन कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीपीडब्ल्यूडी, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से विस्तृत हलफनामे मांगे हैं। अदालत ने भवन से हटाई गई ऐतिहासिक कलाकृतियों और हथियारों की सूची, उनके वर्तमान स्थान और संरक्षण की स्थिति का भी ब्योरा भी तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को निर्धारित की गई है।
भवन के संरक्षण के प्रयास भी जारी
भवन के संरक्षण के लिए एक दशक से प्रयास जारी हैं। वर्ष 2013 में परियोजना क्रियान्वयन समिति गठित की गई। पहले 56.68 करोड़ रुपये की परियोजना रिपोर्ट तैयार हुई जिसे बाद में बढ़ाकर 66.38 करोड़ रुपये किया गया। अगस्त 2020 में रसोई विंग का संरक्षण कार्य शुरू हुआ। मार्च 2023 तक 4.03 करोड़ रुपये खर्च कर 42 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ। अगस्त 2025 तक 6.49 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद प्रगति 68 प्रतिशत तक ही पहुंच सकी। शेष कार्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त पांच करोड़ रुपये की मांग की है।
वर्ष 1884 में शुरू होकर 1888 में पूरा हुआ एडवांस्ड स्टडी भवन कभी ब्रिटिश भारत के वायसराय का आधिकारिक आवास था। यहीं से ग्रीष्मकालीन राजधानी का प्रशासन चलता था और साम्राज्य के कई अहम फैसले लिए जाते थे। वर्ष 1945 का ऐतिहासिक शिमला सम्मेलन भी इसी भवन में हुआ था। आजादी के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 1964 में इसे शैक्षणिक उपयोग के लिए शिक्षा मंत्रालय को सौंप दिया जिसके बाद यहां भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान स्थापित हुआ। वर्ष 1996 में भारत सरकार ने इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में संरक्षित विरासत स्मारक घोषित किया।