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दुर्घटनाग्रस्त वाहन का 6.69 लाख रुपये क्लेम देने के आदेश

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उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का फैसला
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कंपनी ने मुआवजा राशि देने से कर दिया था इनकार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने जगदीश चंद ठाकुर की ओर से यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ दी शिकायत की सुनवाई के बाद कंपनी को शिकायतकर्ता को 6,69,000 रुपये क्लेम राशि देने के आदेश दिए हैं।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह, सदस्य जगदेव सिंह रेटका और योगिता दत्ता ने यह फैसला सुनाया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने आदेश दिया है कि शिकायतकर्त्ता को शिकायत दर्ज कराने की तारीख से 9 फीसदी प्रति वर्ष की दर पर ब्याज के साथ 6,69,000 रुपये चुकाने, मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे के तौर पर 5000 और मुकदमे की लागत के रूप में 3000 रुपये 45 दिन के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
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शिमला के जगदीश चंद ठाकुर ने अपने टिपर की इंश्योरेंस यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से करवाई थी। लगातार इंश्योरेेंस के प्रीमियम का भुगतान करते रहे। इंश्योरेंस अवधि के दौरान टिपर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसकी एफआईआर हुई। जगदीश ठाकुर ने टिपर चलाने के लिए चालक रखा था। चालक रखने से पहले मालिक ने उसका ड्राइविंग लाइसेंस देखा और ड्राइविंग का भी परीक्षण किया। हादसे के बाद इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया।
कंपनी ने दावा किया कि क्योंकि चालक के पास वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, इसलिए क्लेम नहीं दिया जा सकता। दुर्घटना के समय ड्राइविंग लाइसेंस को छोड़ कर गाड़ी के सभी दस्तावेज दुरुस्त थे। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अपने आदेशों में कहा कि ड्राइवर को नियुक्ति देते समय वाहन मालिक ड्राइविंग लाइसेंस की वास्तविकता के बारे में जानने और विस्तृत जांच करने के लिए बाध्य नहीं हैं। आदेशों में कहा है कि दुर्घटनाग्रस्त टिपर के मुआवजे के आकलन का सवाल है तो सर्वेक्षण कर्ताओं ने मौके पर निरीक्षण के बाद अंतिम जांच रिपोर्ट में वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त पाया है।
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माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ओर से पूर्व में दिए आदेशों में कहा है कि ड्राइवर को काम पर रखने के दौरान नियोक्ता के लिए यह जानना अनिवार्य है कि चालक के पास लाइसेंस है या नहीं।अगर ड्राइवर के पास लाइसेंस है जो दिखने में असली लगता है तो नियोक्ता से ड्राइविंग लाइसेंस की प्रमाणिकता की जांच की उम्मीद नहीं की जाती। ऐसे में अगर दुर्घटना होती है तो बीमा कंपनी क्लेम देने के लिए उत्तरदायी होगी।
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