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मनी लॉन्ड्रिंग केस: वीरभद्र और उनकी पत्नी को अदालत से मिली राहत

Fri, 23 Mar 2018 12:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी को अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वीरवार को जमानत प्रदान कर दी। साथ ही मामले में तीन अन्य आरोपियों को भी जमानत मिल गई। ये आरोपी समन पर कोर्ट में पेश हुए थे। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद पांच लोगों को बतौर आरोपी 12 फरवरी को समन जारी किया था।

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ईडी ने इन आरोपियों के खिलाफ 1 फरवरी को पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था। पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज अरविंद कुमार ने वीरभद्र सिंह समेत पांच आरोपियों को पेशी के बाद जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने इन आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक-एक जमानती पर जमानत प्रदान की है।

ईडी ने बीमा एजेंट आनंद सिंह चौहान के खिलाफ सितंबर 2016 में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने इसके मद्देनजर ईडी को पूरक आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था। आनंद चौहान को ईडी ने 8 जुलाई 2017 को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था।

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कोर्ट ने ईडी की चार्जशीट पर बतौर आरोपी जारी किया था समन

जांच एजेंसी ने वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी के अलावा यूनिवर्सल एपल एसोसिएट के मालिक चुन्नी लाल चौहान, प्रेम राज व लवण कुमार रोच को पूरक आरोप पत्र में नामजद किया है। इन पर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं।

एजेंसी ने सीबीआई के केस के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा दर्ज किया था। ईडी का आरोप था कि वीरभद्र सिंह ने 28 मई 2009 से 18 जनवरी 2011 और 19 जनवरी 2011 से 26 जून 2012 के दौरान केंद्रीय मंत्री रहते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित की।

उस काले धन को वीरभद्र ने अन्य आरोपियों व आनंद सिंह के जरिये बीमा में निवेश किया था। सीबीआई के अनुसार प्रारंभिक जांच में पाया गया कि वीरभद्र सिंह ने इस दौरान कथित रूप से आय से अधिक 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की गई थी।
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