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Shimla News: ऋण के दुरुपयोग पर दायर बैंक की शिकायत कोर्ट ने की खारिज

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ऋण लेकर दूसरी जमीन पर बना दिया था घर
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अदालत का तर्क, यह मामला आपराधिक नहीं, दीवानी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में एक बैंक द्वारा ऋण की राशि के दुरुपयोग और धोखाधड़ी को लेकर दायर की शिकायत को अदालत ने खारिज कर दिया है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-एक शिमला प्रतिभा नेगी की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि बैंक द्वारा लगाए आरोप आपराधिक श्रेणी में नहीं आते हैं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि आपराधिक कानून को सामान्य तौर पर गति नहीं दी जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला मुख्य रूप से ऋण अदायगी और संपत्ति से जुड़ा है, इसलिए यह दीवानी प्रकृति का है और इसे आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दायर इस निजी शिकायत को खारिज कर दिया है। शिकायतकर्ता बैंक ने आरोप लगाया था कि शिमला निवासी तीन महिलाओं तारावती, गीता देवी और चंचल ने घर बनाने के लिए दो अलग-अलग किस्तों में 40 लाख और 35 लाख रुपये का ऋण लिया था।

बैंक के अनुसार, ऋण को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने अपनी जमीन को गिरवी रखा था। बैंक ने सरफाइसी एक्ट के तहत इस जमीन पर भौतिक कब्जा लेने का प्रयास किया तो वहां कोई घर नहीं पाया गया। बैंक का आरोप था कि ऋण राशि का दुरुपयोग कर मकान दूसरे खसरा नंबर पर बनाया गया जो उनकी माता का है। बैंक ने इसे आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी करार दिया था।
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मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने पाया कि ऋण समझौतों में कहीं भी यह शर्त नहीं थी कि निर्माण केवल उसी खसरा नंबर पर किया जाना अनिवार्य है जिसे गिरवी रखा था। अदालत ने कहा कि बैंक ने ऋण के बदले जमीन को गिरवी रखा था जो अभी भी बैंक के पास है। इसके अलावा प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि आरोपियों ने करीब दो साल तक ऋण की किस्तें भी चुकाई थीं जिससे उनकी नीयत में खोट का अंदेशा नहीं लगता।
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