एक्सक्लूसिव...
शिकायतकर्ता ने करवाया था होटल का इंश्योरेंस, बारिश और भूस्खलन से हुआ था नुकसान
जमीन पिता और अन्यों के नाम होने की बात कहकर कंपनी ने खारिज कर दिया था क्लेम
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने कहा कि इंश्योरेबल इंटरेस्ट के लिए व्यक्ति का संपत्ति का पूर्ण मालिक होना ही जरूरी नहीं है। शिकायतकर्ता के पिता जमीन के मालिक हैं और वह खुद कानूनी रूप से होटल चला रहे थे इसलिए नुकसान होने पर सीधा आर्थिक घाटा उनको ही हुआ है।
कंपनी ने जमीन का नहीं बल्कि हाेटल के भवन का बीमा किया था। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि होटल व्यवसायी को 9,23,177 रुपये मुआवजा राशि 9 फीसदी ब्याज के साथ अदा करे। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 30,000 रुपये और मुकदमा खर्च के तौर पर 10,000 रुपये अलग से देने के आदेश दिए गए हैं। रामपुर बुशहर के धरली निवासी राज गौरव ने राज होटल नाम से एक भवन बनाया है। उन्होंने इस होटल का नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से भारत गृह रक्षा पॉलिसी के तहत 37 लाख रुपये का बीमा करवाया था जो 14 नवंबर 2022 से 9 नवंबर 2023 तक वैध था। 14 जुलाई 2023 को क्षेत्र मेें भारी बारिश और खराब मौसम के कारण भूस्खलन हुआ जिससे होटल के भवन की नींव को भारी नुकसान पहुंचा था। शिकायतकर्ता ने इसकी रिपाेर्ट राजस्व विभाग और पुलिस में भी दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता ने कंपनी के समक्ष क्लेम पेश किया था। कंपनी के सर्वेयर ने पहले नुकसान का आकलन किया लेकिन बाद में 30 मई 2024 को कंपनी ने क्लेम को पूरी तरह से यह कहकर खारिज कर दिया कि जिस जमीन पर होटल बना है वह जमाबंदी में शिकायतकर्ता के बजाय उसके पिता हरि दास और अन्य लोगों के नाम पर दर्ज है। कंपनी का तर्क था कि शिकायतकर्ता का इस संपत्ति में कोई इंश्योरेबल इंटरेस्ट नहीं है। इस तर्क को आयोग ने पूरी तरह खारिज कर दिया और कंपनी को आदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर पूरी राशि का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।