ऊना। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश-1 परिवार न्यायालय ऊना राजिंद्र कुमार की अदालत ने मंगलवार को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13बी के तहत दायर संयुक्त याचिका को मंजूरी देते हुए दंपती को आपसी सहमति से तलाक की डिक्री प्रदान की।
दोनों की शादी 18 फरवरी 2022 को देहलां अपर में सिख रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। शादी के बाद दोनों पति-पत्नी के रूप में रहे लेकिन संतान नहीं हुई। मार्च 2024 से दोनों के बीच मतभेद शुरू हो गए और पिछले एक साल से अधिक समय से अलग रह रहे थे। सुलह के कई प्रयास भी सफल नहीं हुए।
याचिका में बताया गया कि पति ने पत्नी को एक लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता और 10 ग्राम सोने के आभूषण दिए हैं। साथ ही दहेज और अन्य सामान भी लौटा दिया गया है। पत्नी ने भी पति की ओर से शादी के समय दिए गए आभूषण वापस कर दिए हैं। दोनों पक्षों ने भविष्य में एक-दूसरे से किसी तरह के भरण-पोषण या संपत्ति संबंधी दावे नहीं करने पर सहमति जताई।
अदालत ने दोनों पक्षों की सहमति और वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त होने के तथ्यों को देखते हुए अलग आदेश के तहत संयुक्त याचिका मंजूर कर ली।