19 मई को सभी के सैंपल लिए। 21 मई को पहली रिपोर्ट आई, जिसमें 31 पॉजिटिव आए, जबकि 136 निगेटिव निकले। निगेटिव को भी घर नहीं भेजा ताकि दोबारा सैंपल ले सकें। जिनकी पहले रिपोर्ट निगेटिव आई थी, उनके समेत कुल 176 सैंपल 24 व 25 मई को दोबारा पालमपुर और शिमला भेजे। अगले दिन 122 की रिपोर्ट आई, जिनमें 7 पॉजिटिव निकले।
अन्य सैंपल की रिपोर्ट पैंडिंग थी। इसमें बड़ी बात यह थी कि जिनकी रिपोर्ट पहले निगेटिव थी, वे भी पॉजिटिव निकले। शेष की 26 मई को रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद दियोटसिद्ध, हमीरपुर और जेएनवी में रखे 115 लोगों में 43 लोग घर भेज दिए, लेकिन वार्तालाप में कमी से इनमें 15 लोग पॉजिटिव थे। उपायुक्त ने कहा कि इस मामले कहां चूक हुई, इसकी जांच की जाएगी।
मुंबई से घर लौटे पंद्रह कोरोना संक्रमितों को घर भेजकर प्रशासन ने बड़ी मुसीबत मोल ली है। बुधवार दोपहर बाद प्रशासन ने कोरोना संक्रमितों को निगेटिव समझकर घर भेज दिया। प्रत्येक कोरोना संक्रमित व्यक्ति 8 से 10 घंटे अपने परिवार के बीच रहा। इस दौरान उन्होंने भोजन खाया और शौचालय इत्यादि का प्रयोग भी किया। हालांकि, प्रशासन ने उन्हें 14 दिन तक गृह संगरोध में रहने के सख्त आदेश दिए थे, लेकिन कहीं न कहीं ये लोग अपने आप को निगेटिव मान कर घर में घुसे थे।
अब प्रशासन सभी संक्रमितों के परिवार के सदस्यों के भी सैंपल लेने जा रहा है। इसके लिए संबंधित एसडीएम को बड़ी जिम्मेवारी सौंपी गई है। एसडीएम स्वास्थ्य विभाग के साथ तालमेल बैठाकर कोरोना संक्रमितों के प्राथमिक संपर्क को तलाशने में जुट गया है। प्राथमिक संपर्क में आए सभी लोगों के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब में भेजे जाएंगे। एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान ने भी गति पकड़ ली है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में तालमेल की कमी
जिला हमीरपुर कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है। यहां जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में तालमेल की कमी के कारण यह महामारी और गंभीर होती दिख रही है। जिले से टेस्टिंग के लिए जाने वाले सैंपल और उनकी टेस्ट रिपोर्ट को लेकर आए दिन मतभेद सामने आ रहे हैं। इससे पूर्व डॉ. राधा कृष्णन राजकीय मेडिकल कालेज हमीरपुर के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन भी कोविड-19 अस्पताल भोटा में खामियों को उजागर कर चुका है। जिला कोविड-19 केयर सेंटर डुग्घा में आइसोलेट एक कोरोना संक्रमित ने भी सेंटर में भोजन, पानी और साफ-सफाई को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किया था।