कई देशों में भारत से मांग की जा रही मलेरिया उपचार में काम आने वाली हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन दवा हिमाचल प्रदेश के आधा दर्जन उद्योगों में मौजूदा समय में बनाई जा रही है। हालांकि, दवा निर्माण करने का करीब ढाई दर्जन उद्योगों के पास लाइसेंस है। उधर, दवा नियंत्रक प्राधिकरण का कहना है कि दवा की कोई कमी नहीं है और उद्योग दवा के उत्पादन में जुटे हुए हैं।
वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर इस दवा का इस बीमारी के लिए प्रयोग करना कारगर बताया जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी कोई ठोस जानकारी नहीं है। बावजूद इसके हिमाचल प्रदेश में स्थापित 630 दवा उद्योगों में से करीब 30 उद्योगों के पास इस दवा के निर्माण करने का लाइसेंस है, जबकि मौजूदा समय में आधा दर्जन उद्योग इस दवा का निर्माण कर रहे हैं।
राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह ने बताया कि प्रदेश में स्थापित 630 फार्मा उद्योगों में से ढाई दर्जन उद्योगों के पास इस दवा के निर्माण करने का लाइसेंस है और समय-समय पर इसका निर्माण भी करते हैं। लेकिन, मौजूदा समय में आधा दर्जन उद्योग इस दवा का निर्माण कर रहे हैं। प्रदेश में दवा की कोई कमी नहीं है और उद्योग दवा निर्माण के कार्य में पूरी तन्मयता से जुड़े हुए हैं।