कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए हिमाचल का बिलासपुर जिला प्रशासन कितना गंभीर है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रात को कोरोना पॉजिटिव मामला सामने आने के बाद कंटेनमेंट जोन बनाने के लिए सुबह के 10 बजा दिए। बिलासपुर जिला अस्पताल के एक डॉक्टर ने सुबह पॉजिटिव निकले कंडक्टर की ट्रेवल हिस्ट्री की रिपोर्ट सोशल मीडिया में पोस्ट की, जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। दस बजे के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में शहर की दुकानें बंद कराईं। इससे प्रशासन पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बस कंडक्टर में कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। लेकिन, वह किसी मामले को लेकर अपनी बहन (स्टाफ नर्स) के साथ अस्पताल आया था। डॉक्टर के पास चेकअप करवाने के बाद उससे अपने बारे में डॉक्टर को बताया। जिसके बाद कंडक्टर का सैंपल लिया गया था, जो पॉजिटिव पाया गया है। सूत्रों के अनुसार बस कंडक्टर एक स्कूल मेकेनिक की दुकान, सब्जी की दुकान, खाने की दुकान और एचआरटीसी के कर्मचारियों के संपर्क में आया है। आरएम एचआरटीसी की मानें तो बसों में भेेजे गए ड्राइवर और कंडक्टर जब लोगों को छोड़ कर वापस आ रहे हैं तो उन्हें 14 दिन के होम क्वारंटीन पर भेजा जा रहा है। अगर कंडक्टर होम क्वारंटीन था तो फिर बाजार में कैसे घूमता रहा? जिला प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से नहीं लिया और कटेंनमेंट जोन की घोषणा के लिए सुबह के दस बजा दिए। जब तक प्रशासन की ओर से आदेश जारी हुए तब तक पूरा बिलासपुर खुल चुका था।