हिमाचल प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू 26 मई के बाद भी जारी रह सकता है। यह संकेत मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जब तक हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस को लेकर स्थिति सामान्य नहीं हो जाती है, तब तक सख्ती रखनी होगी। सीएम ने कहा कि कोविड के मामले कम होने पर ही रियायतों के बारे में सोच सकते हैं।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गुरुवा को अपने सरकारी निवास ओक ओवर शिमला के बाहर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा है कि प्रदेश सरकार की मांग पर राज्य के ऑक्सीजन कोटे को 15 से बढ़ाकर 30 मीट्रिक टन किया गया है। अब इसे 40 मीट्रिक टन करने की मांग की गई है।
इसे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। वहीं केंद्र ने राज्य को 1036 अतिरिक्त ऑक्सीजन कंसंट्रेटर देने को भी मंजूरी दी है। सीएम ने कहा कि मरीजों की जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य में पहले से ही 6200 डी-टाइप और 2200 बी-टाइप के सिलेंडर उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य द्वारा सीएसआर के अंतर्गत विभिन्न एजेंसियों से 250 सिलिंडर प्राप्त हुए हैं। प्रदेश सरकार राज्य के लिए 20 किलोलीटर ऑक्सीजन क्रायोजेनिक टैंक स्थापित करने के लिए भी प्रयासरत है। दो टैंक आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज में लगाए जाएंगे।
तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक, हमने तैयारी की
सीएम ने कहा कि कोविड की तीसरी लहर के बारे में भी तैयारी शुरू कर दी गई है। उसे बच्चों के लिए घातक बताया जा रहा है। इस बारे में पीडियाट्रिक्स केयर में क्या किया जा रहा है। इस बारे में विभागों की पूरी तैयारी है।
स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बढ़ावा देगी सरकार
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि स्वयं सहायता समूह कोविड मरीजों के परिवारों की सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि एक परिवार के सभी सदस्य संक्रमित हो जाते हैं तो इस स्थिति में स्वयं सहायता समूह ऐसे परिवारों को उनके पशुधन, कृषि गतिविधियों आदि कार्यों में सहायता करें।
सरकार स्वयं सहायता समूहों की ओर से तैयार उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव सहायता करेगी, जिससे उनके उत्पादों को बेहतर बाजार मिल सके। सीएम ने इन समूहों की वर्चुअल बैठक ली।
कहा कि मुख्यमंत्री एक बीघा योजना ग्रामीण महिलाओं की कृषि से आय बढ़ाने में वरदान सिद्ध हुई है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूह की कोई भी महिला, जिनके पास मनरेगा जॉब कार्ड हो, इस योजना के तहत एक लाख रुपये तक का लाभ ले सकती है।
योजना शुरू होने के बाद अब तक महिलाओं के लिए 10364 कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिन पर 13.90 करोड़ खर्च किए गए हैं। कोरोना महामारी के दौरान इस योजना से मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं को मदद मिली है। इस महामारी के दौरान स्वयं सहायता समूहों को प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए भी आगे आना चाहिए, क्योंकि कोरोना कर्फ्यू के कारण उन्हें रोजगार पाने में कठिनाई हो रही है।
देवताओं से जुड़े और अन्य धार्मिक कार्यक्रम रोकने का आग्रह
मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों से आग्रह किया कि वे लोगों को स्थानीय देवताओं और धार्मिक कार्यों से संबंधित समारोहों को स्थगित करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को संकट की घड़ी में जरूरतमंदों को फेसमास्क और सेनीटाइजर उपलब्ध करवाने चाहिए।