हिमाचल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहले से तैयार मिनट टू मिनट प्रोग्राम को ठुकराकर भाजपा संगठन महामंत्री का सम्मान हुआ है। कुलाधिपति की संस्तुति से बने दीक्षांत समारोह के स्क्रॉल में बिना मंजूरी अंतिम समय में बदलाव किया गया। कुलपति के पदभार संभालने पर भी जय श्रीराम के उद्घोष से विश्वविद्यालय कैंपस गूंजा था।
आरएसएस की कदमताल के बाद छात्रों-स्वयंसेवकों में भीड़ बढ़ने को लेकर भी विवाद हो चुका है। अब गरिमामय दीक्षांत समारोह में भाजपा के संगठन महामंत्री को सम्मानित करने से नया विवाद खड़ा हो गया है। हिमाचल विश्वविद्यालय प्रबंधन की कार्य प्रणाली सवालों केे घेरे में आ गई है। किसी भी राज्य में दीक्षांत समारोह का सबसे पहले स्क्रॉल तैयार होता है। इसमें कुलाधिपति राज्यपाल की संस्तुति ली जाती है। दीक्षांत समारोह के शैक्षणिक सत्र शुरू होने से लेकर समारोह की पूरी प्रक्रिया लिखित में बनाई जाती है।
इसके मुताबिक ही समारोह आगे बढ़ता है। शुक्रवार को एचपीयू के दीक्षांत समारोह के लिए कनवोकेशन स्क्रॉल तैयार किया गया था। इसमें भाजपा के संगठन मंत्री को कुलपति के हाथों सम्मानित करना शामिल नहीं था। शिक्षा मंत्री को स्मृति चिह्न देने के बाद एकाएक भाजपा संगठन मंत्री को स्टेज पर बुलाना और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित करने से नया विवाद खड़ा हो गया है। समारोह के स्क्रॉल में कुलपति के 20 नंबर पर स्वागत भाषण प्रस्तुत करने से पहले संगठन मंत्री को सम्मानित करना शामिल किया गया।
विवि के कुलपति का पदभार संभालने के लिए पहली बार कैंपस पहुंचने पर जय श्रीराम के नारों से अभिनंदन किए जाने के बाद से कुलपति विवादों में घिरते रहे हैं। उनके पद संभालने के बाद पहली बार विवि छात्रावास के बाहर से पोटरहिल की ओर आरएसएस की कदमताल और छात्रों और स्वयंसेवकों के बीच भीड़ बढ़ने पर विवाद हुआ था। पूर्व में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष पद पर रहने के बाद कुलपति का पदभार संभालने के बाद भी संगठन प्रेम कम नहीं हो पा रहा है।
कहीं न कहीं यह नजर आ ही जाता है। विवि का मूल काम परीक्षाओं का सही समय पर संचालन करना और परिणाम समय से निकालने का है। जिसमें हर साल कहीं न कहीं कमियां रह रही हैं। उधर, कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने यहां तक कह दिया कि मुझे आपसे पूछना था क्या।
समारोह में डि लिट से शुरू किया गया डिग्री वितरण
आम तौर पर समारोह के सक्राल में पीएचडी की सबसे बड़ी उपाधि होने के नाते छात्रों को सम्मानित करने की शुरुआत उसी से होती है, मगर दीक्षांत समारोह में मुख्यातिथि के जल्द लौटने की बात को देखते हुए बाकायदा कुलाधिपति से सक्राल में बदलाव कर मुख्यातिथि के हाथों डि लिट की डिग्री से शुरुआत की गई। मुख्यातिथि ने उसके बाद गोल्ड मेडल दिए। उसके बाद राज्यपाल ने मेडल और पीएचडी डिग्री प्रदान की।