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हिलक्वीन में हर ओर पसरी गंदगी, बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ा

Sat, 16 Sep 2017 01:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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क्लीन और स्मोक फ्री शहर का तमगा हासिल करने वाले शिमला शहर में अब हर तरफ गंदगी का माहौल है। लगातार छठे दिन  भी घरों, दफ्तरों से कूड़ा नहीं उठा। सैहब कर्मचारियों की हड़ताल के चलते रास्ते, सड़कें और जंगल कूड़े से भरने लगे हैं। 
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कुत्तों और बंदरों का आतंक भी बढ़ गया है। हर तरफ फैली गंदगी से बीमारियां फैलने का खतरा मंडराने लगा है। निगम की ओर से कूड़ा उठाने के लिए की गई वैकल्पिक व्यवस्था भी कई वार्डों में फेल हो गई है। 


कई जगहों पर निगम की गाड़ियां नहीं पहुंच रही हैं। वहीं, विकासनगर, लोअर खलीणी, कनलोग, टुटू, ढली के निचले इलाकों में जंगलों में ही कूड़ा फेंका जा रहा है। निगम ने यहां कलेक्शन सेंटर तो बनाए हैं लेकिन ये कई घरों की पहुंच से काफी दूर हैं। 
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शहर में सफाई व्यवस्था का जायजा लेने के लिए निगम के अफसर भी शुक्रवार को फील्ड में उतरे। आयुक्त जीसी नेगी की अगुवाई में निगम की टीम ने बालूगंज, चक्कर, अनाडेल, चौड़ा मैदान, खलीणी, झंझीड़ी, समरहिल वार्डों का दौरा किया। लोगों की शिकायतें सुनने के बाद यहां कई ऐसे स्थान भी चिन्हित किए जहां शनिवार से लोग कूड़ा फेंक सकेंगे।

सैहब कर्मियों से शहरवासी भी परेशान
वहीं, सैहब कर्मियों के अड़ियल रवैये से शहरवासी भी परेशान दिखे। कई वार्डों में लोगों ने कहा कि जब तक एजीएम नहीं हो जाती तब तक कर्मियों को काम पर आना चाहिए। आयुक्त के सामने भी कई लोगों ने सैहब कर्मियों की मनमानी के खिलाफ शिकायत की। इनमें लोअर झंझीणी, खलीणी में लोग बोले कि निगम कूड़ा फेंकने की जगह बताए, हम खुद कूड़ा फेंक आएंगे। कहा कि सैहब कर्मियों को जनहित में हड़ताल टालनी चाहिए या फिर कूड़ा उठाने काम आउटसोर्स कर देना चाहिए।

लॉ ऑफिसर के साथ तीखी बहस
सैहब कर्मचारियों की निगम के लॉ ऑफिसर जोगेंद्र चौहान से तीखी बहस हुई। बैठक के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि यदि काम करते वक्त किसी कर्मचारी की मौत हो जाए तो उसके परिवार को मुआवजा तक नहीं मिलता। इस पर लॉ ऑफिसर ने कहा कि सैहब कर्मियों के लिए निगम ने अभी तक ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया है जिसमें उन्हें आर्थिक सहायता दी जा सके। इस पर कर्मी और भड़क गए। कहा कि जब निगम किसी कर्मचारी की मौत की स्थिति में मदद नहीं कर सकता तो फिर बाकी क्या सहयोग करेगा।

एजीएम तय पर मानने को तैयार नहीं कर्मचारी

नगर निगम की ओर से एजीएम (एनुअल जनरल मीटिंग) तय होने के बावजूद सफाई कर्मचारी काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती वे हड़ताल जारी रखेंगे। वहीं, एजीएम की बैठक 18 सितंबर को होगी। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने आखिरकार बैठक में आने के लिए समय दे दिया है।


इस बारे में निगम प्रशासन को पत्र भी मिल चुका है। बैठक तय होने के बावजूद सैहब कर्मचारी हड़ताल पर अड़े हैं। शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे नगर निगम प्रशासन ने हड़ताली कर्मचारियों को फिर से बातचीत के लिए बुलाया। निगम आयुक्त जीसी नेगी ने कहा कि एजीएम तय कर ली गई है और इसमें सैहब कर्मियों की मांगों पर फैसला लिया जाएगा।

ऐसे में कर्मचारियों को अब काम पर लौट जाना चाहिए। आयुक्त ने कहा कि जनहित को देखते हुए कर्मचारी हट छोड़ें और कम से कम एजीएम तक काम करें। इस पर सैहब कर्मचारी यूनियन ने कहा कि पिछली बार भी उन्हें ऐसा ही आश्वासन मिला था। अबकी बार वे झांसे में नहीं आएंगे। यूनियन अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि एजीएम में मांगें पूरी होते ही उसी दिन से कर्मचारी काम पर लौट जाएंगे।

30 नहीं तो 20 फीसदी बढ़ाओ तनख्वाह
आयुक्त के साथ बैठक में सफाई कर्मी कुछ नरम पड़े। इस दौरान कहा कि यदि सेलरी 30 फीसदी नहीं बढ़ा सकते तो इस महीने कम से कम 20 फीसदी बढ़ाकर तो दें। हाउस में पहले ही 10 फीसदी सेलरी बढ़ाई गई है। इसे बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया जाए। इस पर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि बिना हाउस और एजीएम के यह संभव नहीं है। करीब एक घंटे चली बैठक के बावजूद मांगें पूरी नहीं हुई तो कर्मचारी आयुक्त ऑफिस से बाहर आ गए। इसके बाद हड़ताली कर्मचारियों ने डीसी ऑफिस के बाहर धरना प्रदर्शन भी किया।
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एक महीना में ही ठप हो गया भरयाल कूड़ा संयंत्र

शिमला शहर के कूड़े से बिजली बनाने वाला भरयाल कूड़ा संयंत्र शुरू होने के एक माह बाद ही ठप हो गया है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी के कारण इसे बंद करना पड़ा है। खराब मशीनरी को मरम्मत के लिए भेज दिया गया है। संयंत्र को अगस्त में कोर्ट की फटकार के बाद चालू कर दिया गया था। आधी-अधूरी तैयारियों से ही इसे शुरू कर दिया गया। इसकी खामियां अब सामने आ रही हैं। 

रोजाना ट्रायल के बावजूद संयंत्र चालू करने के हफ्ते बाद ही इसमें तकनीकी खामियां सामने आने लगी थी। इस हफ्ते इस प्रोजेक्ट की मशीनरी पूरी तरह से हांफ गई। ऐसे में इससे बिजली बनाने का काम रोकना पड़ा है। हालांकि, शहर से उठने वाला कूड़ा रोजाना यहां पहुंच रहा है। इसे फिलहाल एक जगह इकट्ठा किया जा रहा है। 

नगर निगम प्रशासन का कहना है कि भले ही संयंत्र में खराबी आई हो लेकिन शहर से कूड़ा नियमित रूप से इस प्रोजेक्ट के लिए सप्लाई होता रहेगा। नगर निगम आयुक्त जीसी नेगी का कहना है कि प्रोजेक्ट की मशीनरी में कुछ खराबी आ गई है। कंपनी से इस बारे में बात हुई है। मशीनों की मरम्मत करवाई जा रही है। उम्मीद है जल्द ही यह संयंत्र फिर चालू हो जाएगा।

शहर के लिए फायदेमंद है यह संयंत्र
यह संयंत्र शिमला शहर के लिए दो तरह से फायदेमंद है। एक तो शहर से रोजाना 70 से 90 टन से ज्यादा कूड़ा डिस्पोज करने के लिए इस संयंत्र को भेजा जाता है। दूसरा कूड़े से बनाई जा रही बिजली को सस्ती दरों पर कंपनी स्थानीय लोगों को उपलब्ध करवाया जाता है। करीब 40 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को पिछले महीने ही चालू किया गया था। नगर निगम को कंपनी के साथ हुए समझौते के अनुसार कम से कम 70 टन कूड़ा रोजाना प्रोजेक्ट तक पहुंचाना होता है।
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