क्लीन और स्मोक फ्री शहर का तमगा हासिल करने वाले शिमला शहर में अब हर तरफ गंदगी का माहौल है। लगातार छठे दिन भी घरों, दफ्तरों से कूड़ा नहीं उठा। सैहब कर्मचारियों की हड़ताल के चलते रास्ते, सड़कें और जंगल कूड़े से भरने लगे हैं।
कुत्तों और बंदरों का आतंक भी बढ़ गया है। हर तरफ फैली गंदगी से बीमारियां फैलने का खतरा मंडराने लगा है। निगम की ओर से कूड़ा उठाने के लिए की गई वैकल्पिक व्यवस्था भी कई वार्डों में फेल हो गई है।
कई जगहों पर निगम की गाड़ियां नहीं पहुंच रही हैं। वहीं, विकासनगर, लोअर खलीणी, कनलोग, टुटू, ढली के निचले इलाकों में जंगलों में ही कूड़ा फेंका जा रहा है। निगम ने यहां कलेक्शन सेंटर तो बनाए हैं लेकिन ये कई घरों की पहुंच से काफी दूर हैं।
शहर में सफाई व्यवस्था का जायजा लेने के लिए निगम के अफसर भी शुक्रवार को फील्ड में उतरे। आयुक्त जीसी नेगी की अगुवाई में निगम की टीम ने बालूगंज, चक्कर, अनाडेल, चौड़ा मैदान, खलीणी, झंझीड़ी, समरहिल वार्डों का दौरा किया। लोगों की शिकायतें सुनने के बाद यहां कई ऐसे स्थान भी चिन्हित किए जहां शनिवार से लोग कूड़ा फेंक सकेंगे।
सैहब कर्मियों से शहरवासी भी परेशान
वहीं, सैहब कर्मियों के अड़ियल रवैये से शहरवासी भी परेशान दिखे। कई वार्डों में लोगों ने कहा कि जब तक एजीएम नहीं हो जाती तब तक कर्मियों को काम पर आना चाहिए। आयुक्त के सामने भी कई लोगों ने सैहब कर्मियों की मनमानी के खिलाफ शिकायत की। इनमें लोअर झंझीणी, खलीणी में लोग बोले कि निगम कूड़ा फेंकने की जगह बताए, हम खुद कूड़ा फेंक आएंगे। कहा कि सैहब कर्मियों को जनहित में हड़ताल टालनी चाहिए या फिर कूड़ा उठाने काम आउटसोर्स कर देना चाहिए।
लॉ ऑफिसर के साथ तीखी बहस
सैहब कर्मचारियों की निगम के लॉ ऑफिसर जोगेंद्र चौहान से तीखी बहस हुई। बैठक के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि यदि काम करते वक्त किसी कर्मचारी की मौत हो जाए तो उसके परिवार को मुआवजा तक नहीं मिलता। इस पर लॉ ऑफिसर ने कहा कि सैहब कर्मियों के लिए निगम ने अभी तक ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया है जिसमें उन्हें आर्थिक सहायता दी जा सके। इस पर कर्मी और भड़क गए। कहा कि जब निगम किसी कर्मचारी की मौत की स्थिति में मदद नहीं कर सकता तो फिर बाकी क्या सहयोग करेगा।