पिछले आदेशों के तहत हाईकोर्ट ने पाया था कि नगर परिषद नाहन अवैध निर्माण व अतिक्रमण हटाने में कोई रुचि नहीं दिखा रही है। कोर्ट ने प्रधान सचिव शहरी विकास विभाग को आदेश दिए थे कि वह व्यक्तिगत रूप से नगर परिषद नाहन के कार्यों पर नजर बनाए रखे। कोर्ट ने प्रधान सचिव को नगर परिषद की परिधि में पिछले 10 वर्षों में हुए अतिक्रमण व अवैध निर्माण को हटाने बाबत उठाए गए कदमों की सूची शपथ पत्र के माध्यम से न्यायालय के समक्ष दायर करने को कहा था।
प्रधान सचिव ने शपथपत्र के माध्यम से न्यायालय को बताया कि कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद नाहन द्वारा अवैध निर्माण व अतिक्रमण से जुड़े रिकॉर्ड को पूरा व संतोषजनक नहीं पाया गया है। उन्हें अवैध निर्माण व अतिक्रमण करने वालों के बारे में विस्तृत स्टेटस एक्शन रिपोर्ट तैयार करने के आदेश जारी किए गए हैं। सदस्य सचिव शहरी विकास विभाग ने इस मामले को अपने विचाराधीन रखा था। इसके अलावा जिलाधीश सिरमौर को आदेश जारी किए थे कि वह उनके समक्ष नगर परिषद नाहन की ओर से दायर आवेदन का 30 अप्रैल तक निपटारा कर दे।
इसके अलावा न्यायालय ने राजस्व, पुलिस व अन्य प्रशासन को न्यायालय के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद नाहन को पूरा सहयोग प्रदान करने के आदेश जारी किए थे। मामले पर सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की गई थी। न्यायालय ने आशा जताई थी कि अवैध निर्माण व अतिक्रमण हटाने बाबत न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में सदस्य सचिव शहरी विकास विभाग व कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद नाहन कार्य को अंजाम दे देंगे। लेकिन नगर परिषद, उपायुक्त और एसडीएम अदालत के आदेशों की अनुपालना करने में नाकाम रहे जिसके लिए हाईकोर्ट ने उन्हें अवमानना नोटिस जारी किया है।