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मनाली-लेह मार्ग में दर्रों को काटकर बनेंगी छह टनल

Sun, 14 Jun 2015 09:34 AM IST
अशोक राणा/अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति)
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सामरिक महत्व के 485 किमी लंबे मनाली-लेह मार्ग को केंद्रीय रक्षा मंत्रालय बर्फबारी के दिनों में भी 12 महीने बहाल रखना चाहता है। इसकी रूपरेखा तैयार कर ली है। 8.8 किलोमीटर लंबी निर्माणाधीन रोहतांग टनल के अलावा मनाली-लेह मार्ग पर दर्रों को काटकर छह और टनल बनाई जाएंगी।
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सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अरबों के प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इन टनलों के बनने से चीन सीमा से सटे क्षेत्रों और कारगिल तक सेना आसानी से पहुंच सकेगी। वहीं, सामरिक मार्गों के निर्माण में तेजी लाने के लिए बीआरओ अब निजी कंपनियों की भी मदद लेने जा रहा है।

लाहौल के स्तींगरी में अमर उजाला से विशेष बातचीत में सीमा सड़क संगठन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आरएम मित्तल ने प्रस्तावित सुरंगों के निर्माण की पुष्टि की है। मित्तल के मुताबिक रोहतांग टनल के अलावा शिकुंला, बारालाचा, तंगलंगला, लचुंगला, जोजिला और खारदुंगला दर्रों को काटकर टनल बनाई जाएंगी। इनकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट पर काम शुरू कर दिया गया है।
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इन दर्रों की समुद्रतल से औसतन ऊंचाई 16 हजार से लेकर 21 हजार फुट है। चीन से लगती भारतीय सीमा तक सेना की आवाजाही आसान और कम खर्चीली करने के उद्देश्य से इन टनलों का निर्माण किया जा रहा है। मित्तल ने बताया कि रोहतांग टनल का निर्माण तय समय पर पूरा कर लिया जाएगा।

मनाली-लेह मार्ग को एनएच का दर्जा
केंद्र सरकार ने मनाली-लेह सामरिक मार्ग को नेशनल हाईवे का दर्जा दे दिया है। बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आरएम मित्तल ने बताया कि केंद्र ने मनाली-लेह मार्ग को नेशनल हाईवे-03 में शामिल किया है। अब इसकी मरम्मत और निर्माण में बजट की कमी नहीं रहेगी। इससे पहले चंडीगढ़ से मनाली तक ही नेशनल हाईवे-21 का दायरा था।

मनाली-लेह मार्ग पर दौड़े वाहन
मनाली-लेह सामरिक मार्ग पर करीब सात माह बाद यातायात बहाल हो गया है। शनिवार को बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आरएम मित्तल ने स्तींगरी में वाहनों को हरी झंडी दिखा कर अधिकारिक तौर पर मार्ग को बहाल किया। मार्ग पर अब सेना के वाहनों के अलावा पर्यटक वाहन भी सरपट दौड़ते नजर आएंगे।

बताया जा रहा है कि अगले एक सप्ताह के भीतर पलचान ट्रांजिट कैप से सेना के वाहनों के काफिले लेह-लद्दाख की तरफ रवाना होंगे। बीआरओ के दीपक प्रोजेक्ट ने लगभग तीन महीनों की कड़ी मेहनत के बाद मार्ग बहाल किया है। हालांकि, इस बार दर्रों पर रिकार्ड बर्फबारी हुई थी।
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