भारत की मोदी सरकार आईबी और रॉ की राय को दरकिनार कर रही है। गुप्तचर एजेंसियों की सिक्योरिटी क्लीयरेंस लिए बगैर ही मोदी सरकार विदेशी पूंजी निवेश को बुलावा दे रही है।
यह बात चीन दौरे के दौरान सामने आई है। यह आरोप कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने शनिवार को राजीव भवन शिमला में पत्रकार वार्ता में लगाए।
चतुर्वेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा की वेदी पर विदेशी निवेश लाने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के दौरान दूसरे देशों से आने वाले विदेशी निवेश को राष्ट्रहित की दृष्टि से भारतीय खुफिया एजेंसियों यानी आईबी और रॉ की जांच से गुजरना अनिवार्य था।
मोदी सरकार इस अनिवार्य प्रक्रिया को खत्म कर रही है, जिससे किसी भी तरह से विदेशी निवेश लाया जा सके। क्या यह तुगलकी निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी सैरसपाटे को तर्कसंगत बनाने के लिए राष्ट्रहित के विरोध में किया जा रहा है।
मोदी सरकार पिछली कांग्रेस सरकार की ओर से 2014-15 में रक्षा के लिए आवंटित की गई राशि को भी खर्च करने में असफल रही है। मोदी सरकार 28,446 करोड़ रुपये का इस्तेमाल ही नहीं कर पाई।