कसुम्पटी के कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह(फाइल)
हिमाचल प्रदेश कैबिनेट की ओर से गत दिन विधायकों की कार पर झंडी लगाने को मंजूरी देते ही सोशल मीडिया पर सरकार की किरकिरी शुरू हो गई। कोरोना काल में जहां प्रदेश में मरने वालों की संख्या कम नहीं हो रही, ऐसे में सरकार की ओर से कैबिनेट बैठक में विधायकों की गाड़ियों पर झंडी लगाने की मंजूरी देने पर सोशल मीडिया में तो उबाल है ही, आम लोगों में भी इस पर गुस्सा बढ़ गया है।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यहां तक लिखा है कि प्रदेश में कोरोना से जानें जा रही हैं और विधायकों को झंडी की पड़ी है। इतना ही नहीं, कांग्रेस के विधायक भी सरकार के इस फैसले से सहमत नहीं हैं। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इस विषय पर विपक्ष में चर्चा हुई है, जिसमें एकमत से यह कहा गया कि यह समय झंडियां लेने का नहीं, बल्कि कोरोना महामारी से लड़ने का है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता कोरोना से परेशान है, ऐसे में हम बतौर विधायक अपनी कारों में झंडी नहीं लगाएंगे। इसी तरह कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह ने तो झंडी के विरोध में यहां तक कह डाला है कि जो लोग झंडी लगाएंगे, वे अगली बार गाड़ी लायक भी नहीं बचेेंगे। उन्होंने कहा भाजपा विधायकों के पास पहचान का संकट खड़ा हो गया है, इसलिए झंडी मांग रहे हैं। अनिरुद्ध सिंह ने कहा है कि जब कोर्ट ने लाल बत्ती के लिए मना किया है तो उसके बाद ही नहीं, उससे पहले भी उन्होेंने कभी लाल बत्ती नहीं लगाई। झंडी की जरूरत क्या है, अगर जनसेवक हैं तो सब लोग जानते हैं। झंडी से कोई एमएलए नहीं बनता।
इतना संवेदनशील मामला नहीं : जयराम
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि यह इतना संवेदनशील मामला नहीं है। इससे प्रदेश पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। विधायक अन्य राज्यों की तर्ज पर यह मांग कर रहे थे। इसी पर सरकार ने विचार किया है। कैबिनेट बैठक में विधायकों की गाड़ी पर झंडी के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इस बारे में आगामी निर्णय विधानसभा सचिवालय से होना है कि यह झंडी किस तरह की लगाई जानी है।