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Kaul Singh: पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले व अन्य घोटालों की सीबीआई जांच हो

Sun, 17 Jul 2022 07:42 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

कौल सिंह ने कहा कि हम चुनाव हारे हैं, पर जुआरी नहीं हैं। कहा कि जुआरी तो महेंद्र सिंह हैं, जो बजट और पानी के पाइप अपने क्षेत्र में ले गए। कांग्रेस सरकार के खिलाफ तथ्यों पर आधारित चार्जशीट तैयार कर रही है।
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प्रेस वार्ता करते कौल सिंह ठाकुर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व प्रदेश कोऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष कौल सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार के पांच वर्ष पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों, पेंशनरों, आउटसोर्स कर्मचारियों और किसानों-बागवानों समेत किसी भी वर्ग की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। जनविरोधी नीतियों और भ्रष्टाचार की वजह से अब सरकार का जाना तय है। सेब बाहुल्य क्षेत्रों के लोगों के साथ भाजपा सरकार हमेशा भेदभाव करती रही है।

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कौल सिंह ने कहा कि हम चुनाव हारे हैं, पर जुआरी नहीं हैं। कहा कि जुआरी तो महेंद्र सिंह हैं, जो बजट और पानी के पाइप अपने क्षेत्र में ले गए। कांग्रेस सरकार के खिलाफ तथ्यों पर आधारित चार्जशीट तैयार कर रही है। सरकार 70 हजार करोड़ के कर्ज, पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले और करोड़ों के घोटालों पर सीबीआई जांच करवाए।

साथ ही इन मामलों पर श्वेतपत्र जारी किया जाए। कौल सिंह ने कहा कि विधायक विक्रमादित्य उनके बेटे के समान हैं। सांसद प्रतिभा सिंह को टिकट देने की पैरवी मैंने की थी। उनकी जीत में पूरा सहयोग किया। रविवार को राजीव भवन शिमला में प्रेस सम्मेलन में कौल सिंह ने कहा कि बागवानों के हितों की रक्षा करने में भाजपा सरकार सदैव असंवेदनशील है। 
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सेब पैकिंग सामग्री के दामों में बढ़ोतरी से बागवान सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हैं। 45 से 65 रुपये में मिलने वाली पेटी के 60 से 80 रुपये देने पड़ रहे हैं। पैकिंग सामग्री पर जीएसटी 12 से 18 प्रतिशत किया गया है। कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणाएं जनसभाओं तक सीमित हैं। उन्हें अधिकारी गंभीरता से नहीं लेते।

अफसरशाही मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को तवज्जो नहीं दे रही है। पुलिस भर्ती पेपर लीक मामला सीबीआई को नहीं दिया गया। जांच के नाम पर मात्र औपचारिकताएं हो रही हैं। जल शक्ति विभाग भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बना हुआ है। करोड़ों के पाइप खरीदकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। हिमाचल विश्वविद्यालय में तत्कालीन उप कुलपति ने नियमों को दरकिनार कर भर्तियों में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं की हैं। 

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