प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नियुक्त हजारों अस्थायी शिक्षकों पर विधानसभा चुनाव प्रक्रिया भारी पड़ गई है। चार माह से कंप्यूटर शिक्षकों और दो माह से एसएमसी शिक्षकों को मानदेय नहीं मिला है। मानदेय के लिए बजट जारी करने की डिमांड फाइल सचिवालय में फंसी हुई है।
विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते अफसरशाही इसको लेकर फैसला नहीं ले पा रही है। इसके चलते शिक्षकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी स्कूलों में तैनात कई कंप्यूटर शिक्षकों को जुलाई से अक्तूबर महीने का मानदेय अभी तक नहीं मिला है।
कंप्यूटर शिक्षकों को सरकार ने आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त किया गया है। स्कूली बच्चों से ली जाने वाली कंप्यूटर विषय की फीस को एकत्र करने के बाद शिक्षा निदेशालय निजी कंपनी को अदायगी करता है। कंप्यूटर शिक्षकों की हाजिरी के हिसाब से निदेशालय मानदेय देता है।
लेकिन सैकड़ों शिक्षकों को अभी तक पैसा जारी नहीं किया गया है। कंप्यूटर शिक्षकों का कहना है कि कैबिनेट में बढ़ाया गया मानदेय तो दूर पुराना मानदेय भी अभी तक जारी नहीं हुआ है। इसके चलते शिक्षकों को जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है।