ग्रामीणों ने जनमंच अध्यक्ष एवं कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा से इस बारे में जब पूछताछ की तो उन्होंने संबंधित एसडीएम और बीडीओ से शिकायत न दर्ज करने बारे जवाब तलब किया। लोकेंद्र सिंह और अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनकी शिकायत का सीधे तौर पर राजनीतिकरण हुआ है, जिस कारण उनकी कोई सुनवाई नहीं हो पाई।
उन्होंने चेताया कि यदि जल्द ही पंचायत के विकास कार्यों की अनियमितताओं की जांच नहीं की गई तो वे इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग और जिला प्रशासन से पंचायत में हुई धाधंलियों की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।
जनमंच में दो शिकायतों को डाला गया था। एक शिकायत प्राइमरी स्कूल कशोली स्कूल के भवन को लेकर थी। इस स्कूल को वर्ष 2000 से असुरक्षित घोषित किया है, बावजूद स्कूल में नया भवन नहीं बना है।
जनमंच में उनकी एक शिकायत को लाया गया लेकिन दूसरी शिकायत गायब पाई गई। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि जब उनकी शिकायत नहीं आई तो उन्होंने जनमंच की अध्यक्षता कर रहे कृषि मंत्री डॉ. मारकंडा से इसकी शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा कि उनकी शिकायत को राजनीतिक खेल के चलते जनमंच में नहीं लाया गया है। उधर, जनमंच के प्रदेश संयोजक नरेंद्र बरागटा ने कहा कि वह फिलहाल शिमला से बाहर हैं। लौटने पर इसकी डीसी कुल्लू से रिपोर्ट लेंगे।